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कांग्रेस नेता ने खुद को गोली से उड़ाया

Fri, 04 Dec 2015 09:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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बहराइच। कोऑपरेटिव बैंक के पूर्व चेयरमैन व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सतीश सिंह ने शुक्रवार को घर पर आए एक सहयोगी की रिवॉल्वर से खुद को गोली से उड़ा लिया। पारिवारिक कारणों से वह काफी दिनों से तनावग्रस्त थे।
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पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। अभी परिवार के लोगों ने तहरीर नहीं दी है। पूर्व चेयरमैन का जिले की राजनीति में काफी दबदबा था। वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के भी करीबी माने जाते थे।

दरगाह शरीफ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नहसुतिया निवासी सतीश सिंह (67) की गिनती रसूखदारों में होती थी। युवक कांग्रेस से राजनीति में प्रवेश करने वाले सतीश सिंह वर्ष 1978 से 1994 तक कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन रहे।
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जिंदगी के चौथे पायदान पर होने के चलते वह इस समय कोई जिम्मेदारी नहीं संभाल रहे थे लेकिन संगठन की गतिविधियों में सक्रिय रहते थे। लेकिन, इधर कुछ दिनों से पारिवारिक मसलों को लेकर वह तनावग्रस्त रहते थे। इसकी पुष्टि सतीश के पुत्र शक्ति सिंह व सुनील सिंह ने सीओ सिटी अनूप कुमार को दिए गए बयान में दी।

बेटों ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब चार बजे पिता घर के सामने बैठे थे। इसी समय फखरपुर निवासी लड्डन नेता किसी मुद्दे पर उनसे विचार विमर्श करने पहुंचे।

बातचीत के दौरान सतीश ने लड्डन से उनकी रिवॉल्वर देखने को मांगी। फिर रिवॉल्वर देखते हुए बाथरूम में चले गए। मुश्किल से एक मिनट बीता होगा कि फायरिंग की आवाज से लोग सन्न रह गए। सभी बाथरूम की ओर भागे।

वहां सतीश अचेतावस्था में पड़े थे। गोली कनपटी में लगी थी। उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सीओ सिटी का कहना है कि बेटों ने बताया कि पहले भी पिता ने खुदकुशी की कोशिश की थी। इसलिए उनका लाइसेंसी रिवॉल्वर जमा करा दिया गया था।

राजनीतिक सफर

सतीश सिंह ने वर्ष 1970 में युवक कांग्रेस का सदस्य बनकर राजनीति शुरू की। 1972 से 1974 तक वह युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे, जबकि 1978 में उन्हें कोऑपरेटिव बैंक का चेयरमैन चुना गया।

1978 से 1994 तक उन्होंने चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाली। इसी बीच वर्ष 1977 में महसी से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन 241 वोट से हार गए।

1989 में सतीश ने जनता दल के टिकट पर फखरपुर विधानसभा से भाग्य आजमाया, लेकिन भाग्य ने फिर साथ नहीं दिया और पूर्व मंत्री मयंकर सिंह से चुनाव हार गए।

1996 में उन्होंने एमपी का चुनाव लड़ा, लेकिन उसमें भी मुंह की खानी पड़ी। इसके बाद सतीश सिंह राजनीति में सक्रिय रहे, लेकिन चुनाव के मैदान में नहीं उतरे।
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