बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट रेंज में तैनात वन वाचर का पुत्र शनिवार दोपहर जंगल में सूखी लकड़ियां बीनने पहुंचा। यहां एक धातुनुमा चीज मिलने पर जैसे ही उसने उसमें निकले तार जोड़े, तेज धमाका हो गया।
इसमें वह गंभीर रूप से घायल हुआ है। विस्फोटक के डेटोनेटर होने की आशंका जताई जा रही है लेकिन यह विस्फोटक जंगल में कैसे पहुंचा। इस पर सवाल उठ रहे हैं।
सुजौली थाना क्षेत्र अंतर्गत कतर्नियाघाट गांव गेरुआ नदी के उस पार है। गांव से नेपाल की सीमा महज ढाई किलोमीटर है। गांव निवासी साबिर कतर्नियाघाट रेंज में वन वाचर के पद पर तैनात है।
उसका बेटा 15 वर्षीय शीबू शनिवार दोपहर जंगल के किनारे सूखी लकड़ियां बीनने निकला था। इसी दौरान झाड़ियों में उसे एक धातुनुमा चीज चमकती मिली। जिज्ञासावश शीबू ने उसे उठा लिया।
यह धातु 15 सेंटीमीटर लंबी गोल पाइप की तरह थी। धातु के एक सिरे पर दो तार निकले हुए थे। इन तारों को खेल-खेल में शीबू ने जोड़ दिया तभी तेज धमाका हुआ और शीबू का शरीर छर्रों से बिंध गया। धमाके की आवाज सुनकर गांव के लोग मौके पर पहुंचे तो वह गंभीर रूप से झुलसा मिला।
गेरुआ नदी के तट पर कैंप कर रहे एसएसबी के जवानों को बुलाकर शीबू को बिछिया स्थित एक क्लीनिक पर पहुंचाया गया। डॉक्टर ने किशोर को जिला अस्पताल रेफर कर दिया है।
क्लीनिक के डॉ. सत्तन ने बताया कि शीबू की जो हालत है, उससे लग रहा है कि धमाका काफी शक्तिशाली था। किशोर के शरीर में अनगिनत छर्रे फंसे हुए हैं। उसे ऑपरेशन से ही निकाला जा सकता है।
धमाके की सूचना पाकर सुजौली थानाध्यक्ष वीपी श्रीवास्तव भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि विस्फोटनुमा चीज क्या है, इसका सही अनुमान नहीं लग रहा है। उसे कब्जे में लेकर परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है।
वहीं, एसएसबी के एक जवान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह डेटोनेटर जैसा विस्फोटक मालूम होता है।