फिर लाल निशान के करीब पहुंची घाघरा, ग्रामीणों में दहशत
95 बीघा खेत नदी में समाए, नदी का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ तीन सेंटी मीटर दूर
खतरे का निशान 106.076 घाघरा का जलस्तर - 106.046
फोटों 15-18 में है।
राजीचौराहा (बहराइच)। तराई और नेपाल के पहाड़ों पर रुक-रुक कर हो रही वर्षा के चलते घाघरा नदी के जलस्तर में फिर इजाफा होने लगा है। कटान भी जारी है। नदी की लहरें लाल निशान छूने को बेताब दिख रही हैं। वहीं बुधवार को नदी ने कटान करते हुए 95 बीघा खेती योग्य जमीन को लील लिया। एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज तीन सेंटीमीटर दूर है। जिसके चलते एकबार फिर नदी के तट पर बसे लोग दहशत में आ गए हैं। हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर निरंतर जारी है। नदी के जलस्तर में दो दिन पूर्व कमी दर्ज की जा रही थी। वहीं 24 घंटे से नदी का जलस्तर स्थिर हो गया था। लेकिन तराई व नेपाल के पहाड़ों पर रात में हुई वर्षा के चलते बुधवार सुबह से घाघरा नदी के जलस्तर में तीन सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी शुरू हो गई। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील शुक्ला ने बताया कि नदी का जलस्तर 106.046 मीटर मापा गया है। जो लाल निशान 106.076 मीटर से सिर्फ तीन सेमी कम है। हालांकि एक बजे से नदी का पानी फिर ठहर गया। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के चलते कटान भी तेज हो गई है। गोलागंज, कहारनपुरवा, पिपरी के निकट नदी ने कटान करते हुए अर्जुन, बसंतू, लालू, कन्हैया, गुलाब, विलास और करन समेत 11 ग्रामीणों की 95 बीघा खेती योग्य जमीन का अस्तित्व खत्म कर दिया है। इसके अलावा पिपरी से बौंडी के मध्य लगभग 370 बीघा खेती योग्य जमीन कटान की भेंट चढ़ी है। अचानक कटान में इजाफा होने से नदी के तटवर्ती इलाकों में बसे लोग दहशत में हैं। सूचना के बाद भी कटान रोकने के उपाय नहीं हुए हैं।