अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय के न्यायालय ने दहेज हत्या के पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने इस मामले में पति को आठ वर्ष एवं चार अन्य परिजनों को तीन-तीन वर्ष के कारावास एवं 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष की ओर से कोतवाली हसायन में रजनेश पुत्र श्याम सिंह निवासी जिटौली थाना निधौली कलां जिला एटा ने तहरीर दी। इसमें आरोप था कि उसकी बहन रश्मि की शादी कैलाश निवासी बरसामई हसायन के साथ चार फरवरी 2013 को हुई थी। शादी में उसके पिता ने पांच लाख रुपये दान-दहेज में दिए, परंतु रश्मि के पति कैलाश, ससुर राधेश्याम, सास बैकुंठी देवी, जेठ करमवीर और जेठानी खुशबू इससे संतुष्ट नहीं थीं। यह लोग अतिरिक्त दहेज में एक कार की मांग कर रहे थे।
मांग पूरी नहीं होने पर रश्मि को शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। 24 अक्तूबर 2013 को उसे 5.30 बजे फोन पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने सूचना दी कि अभियुक्तगण उसकी बहन को मार रहे हैं। जब वह अपने परिजनों के साथ मौके पर पहुंचे तो रश्मि घर पर मृत अवस्था में मिली। उसके शरीर पर चोटों के निशान हैं। आरोपी उसकी मृतक बहन को छोड़कर भाग गए हैं। न्यायालय ने मामले में दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना।
इसके बाद धारा 498 ए के तहत पांचों आरोपियों को तीन-तीन वर्ष के कारावास एवं पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई, जबकि धारा 4 के तहत सभी को दो-दो वर्ष के कारावास एवं पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई, जबकि दोषी करार दिए गए पति कैलाश को धारा 304बी में तहत आठ वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। अन्य सभी अभियुक्तों को इस धारा में आरोप मुक्त किया गया है। न्यायालय ने सभी सजाएं एक साथ चलने एवं जेल में बिताई गई अवधि को सजा में शामिल किए जाने का भी आदेश दिया है।