राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल में बुखार, उल्टी और गैस समेत अन्य जीवन रक्षक दवाइयां खत्म हो गई हैं। मरीज काउंटर पर पर्चा लेकर पहुंचते हैं तो उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है। ऐसे में मरीज बाहर से दवा खरीदने को मजबूर हैं। उनकी जेब ढीली हो रही है। अधिकारियों की मानें तो मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था के कारण समस्या उत्पन्न हुई है। दवाओं के स्टॉक का इंडेंट बनाया जा रहा है।
जिला अस्पताल देवीपाटन मंडल का आदर्श अस्पताल माना जाता है। हाल ही में जिला अस्पताल को राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से भी संबद्ध कर दिया गया है। बहराइच के जिला अस्पताल पर जिले की 40 लाख से अधिक की आबादी का भार है साथ ही पड़ोसी जनपद श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा और नेपाल के रोगी भी अस्पताल आते हैं। हाल ही में जिला अस्पताल की क्षमता बढ़ाई गई है। 500 से अधिक बेड हैं।
गर्मी में रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। लेकिन अब अस्पताल में दवाओं की किल्लत हो गई है। बीते दो दिनों से जिला अस्पताल में बुखार, दर्द, गैस, उल्टी, खुजली समेत अन्य जीवन रक्षक दवाओं का स्टॉक खत्म हो गया है। मरीज ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के बाद दवा का पर्चा लेकर दवा वितरण कक्ष के काउंटर पर पहुंचते हैं तो वहां पर दवा न होने की बात कहकर मरीजों को उल्टे पांव लौटाया जा रहा है।
ये नहीं हैं दवाएं, इंजेक्शन का भी अभाव
जिला अस्पताल के भंडार कक्ष में पैरासीटामाल टेबलेट और सिरप, डाइक्लो, ओमेज, एल्बेंडाजॉल, पेरीनार्म, सिटरजीन आदि महत्वपूर्ण दवाएं नहीं हैं। इसके अलावा जीवन रक्षक इंजेक्शन का भी अभाव है।
मार्च व अप्रैल का नहीं मिला बजट
जिला अस्पताल में दवा खरीद के लिए प्रतिमाह का बजट शासन की ओर से जारी किया जाता है। मार्च माह बीत गया। अप्रैल भी बीत रहा है। अब तक शासन की ओर से दवा खरीद के लिए बजट जारी नहीं किया गया है। जिस कारण अस्पताल प्रशासन दवा नहीं खरीद सका है। प्रशासनिक अधिकारी शीघ्र बजट जारी होने की उम्मीद जता रहे हैं।
तैयार करवाया है इंडेंट, रोगियों को नहीं हो रही परेशानी
एक सप्ताह से दवा की सप्लाई नहीं आ सकी है। जिस कारण कुछ जीवन रक्षक दवाओं का स्टॉक निल हुआ है। सभी दवाओं का इंडेंट तैयार करवाया गया है। कोशिश है कि सप्ताह भर के अंदर दवाओं की खेप अस्पताल को मिल जाए।
जिला अस्पताल में भर्ती रोगियों को परेशानी नहीं होने दी जा रही है। चिकित्सक जो दवाएं लिख रहे हैं। उन्हें बाजार से लोकल परचेजिंग करवाकर रोगियों को मुहैया करवाया जा रहा है।
-डॉ. डीके सिंह, सीएमएस
इमरजेंसी में पहुंचते ही मिल जाता बाहर का पर्चा
जिला अस्पताल में देवदत्तपुर निवासी गोबरे भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि बुखार व उल्टी-दस्त की शिकायत पर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन इमरजेंसी में डॉक्टर न देखने के बाद मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने को कहा। बताया गया कि अस्पताल में दवाएं खत्म हैं। बेगमपुर निवासी इंद्रावती ने बताया कि तीन दिन से भर्ती हैं। बाहर की दवाएं खरीदकर इलाज करा रहे हैं।
...तो इसलिए हुई समस्या
मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. डीके सिंह ने कहा कि जिला अस्पताल राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध किया गया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं नए सिरे से बनाई जा रही हैं। उसी के चलते दवा की खेप नहीं आ सकी है। उच्चाधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है।