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मौत के मुहाने पर 369 कुपोषित बच्चे

Tue, 28 Jul 2015 10:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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बहराइच। अफसरों की गोद में भी बच्चों की सेहत सुधरी नहीं है। 70 गांवों के 369 बच्चों की काया सूख चुकी है। चल-फिर न पाने के कारण ये मौत के मुहाने पर हैं।
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इसका खुलासा राज्य पोषण मिशन की रिपोर्ट से हुआ है। बावजूद इसके कुपोषित बच्चों की सेहत दुरुस्त करने के लिए अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में सन्नाटा पसरा है।

प्रशासनिक दावे, इंतजाम सब फेल हैं और अफसर मौन है। अब ऐसे में बहराइच कुपोषण मुक्त कैसे होगा, ये सिस्टम के लिए बड़ा सवाल है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक तराई में पांच वर्ष से कम उम्र के 42 फीसदी बच्चों का वजन उनकी उम्र के हिसाब से कम है, जबकि सात फीसदी बच्चे अति गंभीर रूप से कुपोषित हैं।
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इन बच्चों में मृत्यु की संभावना नौ गुना अधिक होती है। बहराइच समेत प्रदेश के 22 जिलों में बच्चों की स्थिति काफी नाजुक है।

शासन के निर्देश पर जिला अस्पताल बहराइच के चिल्ड्रेन वार्ड में पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया। इस पर दो लाख रुपये खर्च किए गए। यहां अति कुपोषित छह बच्चों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था है।

केंद्र बच्चों को पसंद आए, इसके लिए सभी दीवारें आकर्षक रंगों से पेंट की गईं। सुंदर पोस्टरों के साथ खेल-खिलौनों का भी इंतजाम है। इसके बावजूद यहां सन्नाटा पसरा हुआ है।

मार्च से अभी तक 30 कुपोषित बच्चों को सुविधा मिल सकी है लेकिन सिर्फ 9 बच्चों ने अपना पूर्ण इलाज कराया है। शेष 21 बच्चों को उनके तीमारदार बिना इलाज कराए ही घरों को लौट गए।

अफसरों ने 70 गांव लिए हैं गोद
राज्य पोषण मिशन योजना अंतर्गत जिले के 14 विकासखंडों में प्रत्येक ब्लॉक के पांच-पांच गांव अफसरों ने गोद लिए हैं।
गोद लिए गए 70 गांवों में मई की रिपोर्ट के अनुसार 78 हजार 446 बच्चे कुपोषण के चंगुल में है। इनमें 369 बच्चे अतिकुपोषित हैं। ये आंकड़े बाल विकास व स्वास्थ्य योजनाओं की पोल खोल रहे हैं।

नहीं मिल रहा पौष्टिक भोजन
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा कहते हैं कि अस्पताल में भर्ती हो रहे बच्चों की रिपोर्ट बताती है कि शून्य से पांच वर्ष आयु के बच्चों को पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा है।

सूखी रोटी व चावल बच्चों की काया को सूखा रही है। कुपोषण की शुरुआत मां के गर्भ से ही होती है, इसलिए परिवारों को गर्भवती महिलाओं के सेहत को लेकर सजग रहना चाहिए। प्रसव के बाद बच्चों को छह माह तक स्तनपान व उसके बाद पौष्टिक भोजन देना चाहिए।

विशेषज्ञ की निगरानी में होता इलाज
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ माहेश्वरी पांडेय कहते हैं कि पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने वाले बच्चे का पूर्ण इलाज किया जाता है। इस समय कोई भी बच्चा भर्ती नहीं है।

आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां कुपोषित बच्चे को यहां भर्ती कराती हैं, इसके लिए उन्हें सौ रुपये प्रोत्साहन स्वरूप व अटेंडेंट को सौ रुपये प्रतिदिन दिया जाता है।
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