बालश्रम व अन्य मामलों में पकड़े जाने या घर से भटके बच्चों को अब बाल मैत्री पुलिस स्टेशन में आसरा मिलेगा। प्रदेश के 14 जिलों में बाल मैत्री पुलिस स्टेशन स्थापित होंगे। इनमें बहराइच भी शामिल है। बहराइच के कोतवाली देहात का चयन बाल मैत्री पुलिस स्टेशन के लिए हुआ है। इस कोतवाली में पकड़े गए या घर से भटके हुए बच्चों के मिलने पर उन्हें एक विशेष कमरे में घर जैसा माहौल दिया जाएगा। खेलने और पढ़ने की व्यवस्थाएं होंगी। बाल मैत्री पुलिस स्टेशन स्थापना की कवायद भी शुरू हो गई है।
श्रम विभाग, चाइल्ड लाइन, बालश्रम, बाल विवाह व अन्य कुरीतियों से बच्चों को बचाने के लिए अभियान चलाता है। होटलों और ईंट-भट्ठों व अन्य स्थानों से पकड़े गए बच्चों को चाइल्ड लाइन या श्रम विभाग 24 घंटे से अधिक अपने पास नहीं रख सकता। कोई चाइल्ड होम भी नहीं है। ऐसे में थाने पहुंचने पर पुलिस की वर्दी देखकर बच्चे और भी खौफजदा हो जाते थे। जिससे पुलिस की मुश्किल तो बढ़ती ही थी।
बच्चों की तफ्तीश भी सुचारु तरीके से नहीं हो पाती थी। इस समस्या को देखते हुए पुलिस विभाग ने गृह विभाग और यूनिसेफ के संयुक्त सहयोग से बाल मैत्री पुलिसिंग परियोजना शुरू की है। जिसके तहत प्रदेश के 14 जिलों को चिन्हित किया गया है। इनमें बहराइच भी शामिल है। परियोजना के तहत जिले का एक थाना ऐसा चयनित होगा, जिसे बाल मैत्री पुलिस स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा।
थाने के एक हिस्से में बच्चों के रहने के लिए कमरा स्थापित किया जाएगा। दीवारों पर कार्टून और चित्र बने होंगे। फर्नीचर, बेड, वाटर कूलर, हार्ड बोर्ड, साफ्ट बोर्ड आदि की व्यवस्था होगी। खिलौने भी कमरे में मौजूद रहेंगे।
इस परियोजना के लिए 80 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए बजट का आवंटन पुलिस महानिदेशक महिला सम्मान प्रकोष्ठ की ओर से कर दिया गया है। एसपी सालिकराम वर्मा ने बताया कि कोतवाली देहात का चयन बाल मैत्री पुलिस स्टेशन के लिए किया गया है।
कोतवाली एक हिस्से में बड़े कमरे को बाल गृह के रूप में विकसित किया जाएगा। बाल मैत्री पुलिस स्टेशन में जिन बच्चों को रखा जाएगा। उन बच्चों की जिम्मेदारी एक उपनिरीक्षक महिला व एक उपनिरीक्षक पुरुष पर होगी। लेकिन इन बच्चों के सामने पुलिसकर्मी वर्दी में नहीं जा सकेंगे।
विशेष पुलिस इकाई की भी स्थापना की जाएगी। यहां पर बच्चों से संबंधित विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं से समन्वय स्थापित कर किशोरों के कानून और अधिकार की सुरक्षा होगी। उधर, किशोर इकाई संचालन के लिए सीओ रैंक का अधिकारी जिला प्रभारी होगा।
इसके अलावा एक दरोगा को बाल कल्याण अधिकारी के रूप में नामित किया जाएगा। एक महिला उपनिरीक्षक, दो आरक्षी, ऑपरेटर तथा आरपीएफ, जीआरपी के सिपाही तथा दो समाजसेवी भी रहेंगे। किशोर इकाई संचालन के लिए बहराइच, गोंडा, बलरामपुर जिलों के पुलिसकर्मियों का प्रशिक्षण पुलिस लाइन बहराइच में हो चुका है। देहात संस्था के जिला कार्यकारी डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी ने प्रशिक्षण लिया है।