बहराइच। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की संवेदनहीनता फिर सामने आई है। यहां सोमवार देर रात गंभीर हालत में लाए गए दुधमुंहे को बिना देखे ही वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ ने लखनऊ रेफर कर दिया। तीमारदार जब मासूम को लेकर निकलने लगे तभी खुद को डॉक्टर का असिस्टेंट बताकर एक युवक ने बच्चे का ऑक्सीजन मास्क हटा दिया।
बच्चे ने कुछ ही पलों में दम तोड़ दिया। इससे भड़के घर वालों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। इस मामले में बाल रोग विशेषज्ञ और उनके कथित असिस्टेंट के खिलाफ नगर कोतवाली में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। असिस्टेंट फरार है।
शहर के मोहल्ला फतेहपुरा निवासी निशांत गुप्ता उर्फ अंकुर के बेटे वर्द्धन (4 माह) की सोमवार रात तबियत बिगड़ गई। परिवारीजनों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। यहां ड्यूटी मिले बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विश्वास चंद्रा ने इलाज शुरू किया लेकिन रात करीब नौ बजे उसकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई।
डॉ विश्वास ने वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा को बुलाया और वर्द्धन को ऑक्सीजन पर रखा। थोड़ी देर में डॉ वर्मा मौके पर पहुंच गए लेकिन उन्होंने मासूम को देखने की जहमत नहीं उठाई। बिना वर्द्धन की सेहत जांचे ही उसे केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया और वार्ड में मरीजों को देखने चले गए।
घर वाले वर्द्धन को लखनऊ ले जाने के लिए निकल ही रहे थे तभी वार्ड में मौजूद प्रदीप नामक युवक ने अपने को डॉक्टर का असिस्टेंट बताते हुए बच्चे के मुंह से ऑक्सीजन मॉस्क हटा दिया। इस दौरान वार्ड की स्टाफ नर्स साधना ने ऐसा करने से मना किया लेकिन उसने एक न सुनी।
आरोप है कि प्रदीप शराब के नशे में था। अस्पताल से बाहर निकलते ही वर्द्धन ने दम तोड़ दिया। इससे परिवारीजनों में कोहराम मच गया। सभी ने सीएमएस को पूरे मामले की जानकारी देनी चाही लेकिन उनका मोबाइल रिसीव नहीं हुआ। गुस्साए परिवारीजन अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए और सीएमएस और डॉक्टर पर लापरवाही का मुकदमा दर्ज करने के साथ ही आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए।
सूचना पर टीम के साथ सिटी मजिस्ट्रेट वीएन पांडेय और सीओ अनूप कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने की बात कहकर मामला शांत कराया। मंगलवार को वर्द्धन के पिता अंकुर की तहरीर पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ केके वर्मा व प्रदीप के खिलाफ नगर कोतवाली में केस दर्ज किया गया है। घटना के बाद से प्रदीप फरार है।
मैं प्रदीप को जानता ही नहीं
वर्द्धन ब्रांको निमोनिया से पीड़ित था। बच्चे का इलाज डॉ विश्वास चंद्रा कर रहे थे लेकिन हालत ज्यादा बिगड़ने पर मुझे बुलाया गया। मैंने इलाज में कोई कोताही नहीं बरती। रही बात प्रदीप की तो मैं उसे जानता ही नहीं। वो मेरा अस्सिटेंट नहीं है।
-डॉ. केके वर्मा, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ
मामले की जांच करेंगे
चिकित्सकों ने इलाज में लापरवाही नहीं बरती है। गंभीर हालत में बच्चे को अस्पताल लाया गया था। अभी पीड़ित पक्ष ने कोई शिकायत नहीं की है। यदि पत्र मिलेगा तो मामले की जांच कराई जाएगी। जरूरत पड़ी तो मजिस्ट्रेटियल या अपर निदेशक स्वास्थ्य देवीपाटन मंडल को भी जांच के लिए पत्र लिखा जाएगा। दोषियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।
- डॉ. माहेश्वरी पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
... तो यहां बाहरी कर रहे मरीजों का इलाज
वर्द्धन की मौत से जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मासूम के मुंह से ऑक्सीजन मॉस्क को बाहरी व्यक्ति प्रदीप ने हटाया था। ऐसा उसने किसके कहने पर किया और वह वार्ड में कैसे पहुंचा, ऐसे तमाम सवाल हैं जो यह स्पष्ट कर रहे कि डॉक्टरों की शह पर अस्पताल में बाहरी व्यक्ति मरीजों के करता-धरता बने हैं।