पयागपुर में नहर में गंगटीक डॉल्फिन को पकड़कर ले जाते वनकर्मी।
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पयागपुर (बहराइच)। पयागपुर रेंज के अमदापुर शंकरपुरवा गांव के पास सरयू नहर में लगभग 10 दिनों से एक डॉल्फिन उछलकूद कर रही थी। ग्रामीण उसे देखकर रोमांचित हो रहे थे। सूचना पाकर मंगलवार को वन विभाग और टीएसए (टर्टल सरवाइवल एलायंस) की टीम मौके पर पहुंची और डॉल्फिन को रेस्क्यू किया। इसके बाद उसे राप्ती नदी में छोड़ दिया गया। डॉल्फिन की उम्र करीब छह वर्ष है।
श्रावस्ती वन प्रभाग के पयागपुर रेंज अंतर्गत अमदापुर शंकरपुरवा गांव के पास सरयू नहर बहती है। इस नहर में लगभग 10 दिन से एक जलीय जीव की हलचल हो रही थी। जीव के नदी में दिखने पर लोगों में कौतूहल था। इसकी सूचना लोगों ने वन विभाग को दी। श्रावस्ती के प्रभागीय वनाधिकारी सीबी यादव ने नदी में डॉल्फिन के होने की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी, जिस पर वन विभाग की टीम ने तीन दिनों तक लगातार नहर में निगरानी की। इसके बाद इसकी पहचान गैंगेटिक डॉल्फिन के रूप में हुई।
सीबी यादव ने इसके लिए लखनऊ के उच्चाधिकारियों से वार्ता की। उनके निर्देश पर मंगलवार को टीएसए (टर्टल सरवाइवल एलायंस) की टीम पयागपुर पहुंची। टीम के सदस्यों ने वन कर्मियों की मदद से मशक्कत के बाद डॉल्फिन को पकड़ लिया। इसके बाद उसे इकौना-भिनगा मार्ग पर स्थित राप्ती नदी में छोड़ दिया। रेस्क्यू टीम के प्रमुख डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि यह डॉल्फिन साफ पानी में रहने वाली जलीय जीव है। उन्होंने बताया कि डॉल्फिन की लंबाई छह फुट चार इंच है। वह नर है।
30 साल होती है डॉल्फिन की उम्र
टीएसए के शैलेंद्र सिंह ने बताया कि डॉल्फिन की औसत आयु 30 वर्ष होती है। उन्होंने कहा कि लोग गलती से इसे मछली मान लेते हैं, लेकिन यह मछली नहीं है। डॉल्फिन तीन से पांच मिनट बाद नदियों से बाहर निकलकर श्वसन क्रिया करती है।
सेंसर से करती है पहचान
गैंगेटिक डॉल्फिन के आंख नहीं होती है। इसके मस्तिष्क में पाए जाने वाले विशेष सेंसर से यह आकृति बनाकर पहचान करती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में एकमात्र डॉल्फिन के रूप में गैंगेटिक की पहचान है। यह राष्ट्रीय जीव है।