एसीएमओ डॉ. जेएन मिश्रा के फार्म हाउस में भारी तादाद में बरामद हुए गायों के अवशेष को लेकर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। आयुर्वेद के चिकित्सकों के मुताबिक गाय के अस्थिपंजर से शंख भस्म जैसा चूर्ण बनाया जाता है। वहीं, वैद्य के अनुसार गौमूत्र लिवर और कैंसर के साथ चर्म रोगों को दूर करता है।
बुबकापुर गांव में स्थित एसीएमओ डॉ. जेएन मिश्रा के फार्म हाउस में दफनाई गईं 38 गायों के अवशेष बरामद हुए हैं। कई जगह पर गौमूत्र को संकलित करने के लिए भी व्यवस्था की गई थी। फार्म हाउस से भारी मात्रा में आयुर्वेदिक दवाओं और कैप्सूल के साथ ही पाउडर का जखीरा भी मिला है। 20 बोरियों में रखी जड़ी-बूटियां भी बरामद हुई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि फार्म हाउस पर गैर कानूनी तरीके से आयुर्वेदिक दवाएं बनाई जा रही थीं।
औषधि विभाग की ओर से किसी प्रकार का लाइसेंस नहीं जारी किए जाने की पुष्टि भी हो चुकी है। आयुर्वेदिक दवाएं बनाने में गायों के अवशेष का प्रयोग किए जाने के संबंध में आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक पांडेय गुलशन का कहना है कि दवाएं बनाने में गायों के अवशेष के प्रयोग की सही जानकारी जांच के बाद ही पता चल सकती है। हालांकि गाय के अस्थिपंजर से शंख भस्म का चूर्ण बनाया जाता है, जो शरीर में कैल्शियम को बढ़ाता है।
वहीं, इस बारे में नानपारा के भवनियापुर रामगढ़ी में आश्रम चला रहे वैद्य प्रेमशरण मिश्रा का कहना है कि वैद्यकीय पद्धतियों में गायों के अवशेष का प्रयोग नहीं है। लेकिन गाय के गोमूत्र से लिवर और कैंसर जैसी बीमारियों की अचूक दवाएं बनाई जाती हैं। जबकि गोमूत्र से चर्म रोग को ठीक करने में भी मदद मिलती है। गाय के खुर से महाशल्य धूप भी बनाई जाती है, जो मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों को ठीक करने में प्रयोग होती है। इसी तरह गाय के पित्त की थैली में गौरोचन भी मिलता है। यह भी कई प्रकार की औषधियों के निर्माण में प्रयोग किया जाता है।
प्रशासन की छापेमारी में एसीएमओ के फार्म हाउस से पाउडर से भरे जार मिले हैं। इन चूर्णों पर एक में लिवर और दूसरे पर ब्रेन की स्लिप भी लगी हुई है। ऐसे में चिकित्सकों की ओर से बताए जा रहे तरीकों को कुछ लोग सही ठहरा रहे हैं। माना जा रहा है कि गाय के अवशेषों का इनमें प्रयोग किया गया होगा। मगर, पशु व औषधि विभाग के चिकित्सक व अधिकारी जांच रिपोर्ट में पुष्टि होने पर ही कुछ बता पाने की बात कह रहे हैं।