बहराइच। लखनऊ-बहराइच मार्ग (एनएच-927) से गोंडा मार्ग (एसएच-30) को जोड़ने के लिए 11.777 किमी बहराइच बाईपास निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके लिए आठ गांवों की 27.4623 हेक्टेयर भूमि ली जा रही है। इस प्रोजेक्ट से आम लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसके अध्ययन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस परियोजना से 685 किसान प्रभावित हो रहे हैं।
शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने और लखनऊ, गोंडा समेत पूर्वांचल से आने-जाने वाले वाहनों को तेज और सुरक्षित कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए आधे दशक पूर्व लखनऊ-बहराइच मार्ग से गोंडा मार्ग को जोड़ने की कवायद शुरू हुई थी। उस प्रस्ताव को अब शासन ने हरी झंडी दे दी है।
बहराइच-लखनऊ बाईपास गोंडा-बहराइच मार्ग पर खलीलपुर बेरिया से निकलकर फखरपुर के टेंड़वाबसंतपुर के पास लखनऊ मार्ग को जोड़ेगा। इस महत्वाकांक्षी बाईपास परियोजना के जद में सदर तहसील के खलीलपुर बेरिया, मसीहाबाद, गोकुलपुर, बैकुंठा, सेहरिया, गौरिया, पिपरिया महिपाल सिंह और महसी तहसील के फखरपुर विकासखंड के टेड़वा बसंतपुर गांव के 685 किसानों की जमीन आएगी।
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि भूमि अधिग्रहण के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। परियोजना के लिए चिह्नित आठ ग्राम पंचायतों के 685 किसानों की 287 गाटा संख्या की जमीन प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा है कि जिन ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहण के जद में आ रही है, उन ग्रामीणों के लिए उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी।
बताया कि यह बाईपास बनने से जहां शहर को जाम की समस्या से राहत मिलेगी, वहीं लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मुहैया होंगे। डीएम ने कहा कि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और पुनर्वास की गारंटी दी जाएगी।
जमीन अधिग्रहण से पहले होगा सामाजिक अध्ययन
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि महत्वाकांक्षी बाईपास परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण से प्रभावित क्षेत्र का सामाजिक अध्ययन किया जाएगा, ताकि अधिग्रहण के दौरान आने वाली समस्याओं के साथ ही बाईपास निर्माण के लाभ और हानि की भी जानकारी सामने आ सके। बताया कि इसके लिए प्रतिष्ठित संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और गैर-सरकारी संगठनों का सहयोग लिया जा रहा है। इस अध्ययन से यह भी तय होगा कि भूमि अधिग्रहण का स्थानीय किसानों, ग्रामीणों और पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा और पुनर्वास की क्या संभावनाएं रहेंगी।