कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को बौद्ध अनुयायियों ने गुलजार रही। थाईलैंड से आए बौद्ध अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में आनंद बोधि व गंध कुटि पर विशेष प्रार्थना किया। इसके बाद अनुयायियों ने तपोस्थली के विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी भी ली। इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद ने कहा कि तथागत भगवान बुद्ध को ईसा पूर्व 528 वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधि वृक्ष (पीपल) के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई। इसके बाद वह मूल बोधि वृक्ष का पहला सम्यक सम्बुद्ध उत्तराधिकारी बने। श्रावस्ती के लोगों को ऐसा लगता था कि तथागत बुद्ध कहीं श्रावस्ती को छोड़कर दूसरी जगह न चले जाए। आखिरकार तथागत बुद्ध के श्रावस्ती छोड़ने का संकल्प श्रावस्ती वासियों को पता चला। इसलिए वह बेहद दुखी और बेचैन हुए। तथागत की याद सदा के लिए श्रावस्ती में रहे। इसलिए बोधगया के बोधि वृक्ष की एक टहनी श्रावस्ती में लाकर लगाई जाए। ऐसी उन्होंने तथागत से विनती की। सभी लोगों की श्रद्धा को देखकर खुद तथागत बुद्ध ने बोधि वृक्ष की टहनी लाने के लिए आनंद को बोधगया भेजा। आनंद बोधगया से बोधिवृक्ष की एक टहनी लाकर तथागत बुद्ध के आदेशानुसार श्रावस्ती के जेतवन में विधिवत रूप से उसे लगाया। संवाद