पांच वर्षों में वोट के बदले लोगों को निराशा और भ्रष्टाचार ही नसीब हुआ। ऐसे में अब तराई के युवा, बेरोजगार व अन्य महकमों के लोग स्वच्छ, ईमानदार व पढ़े-लिखे नुमाइंदे की वकालत कर रहे हैं।
कैंपस कार्यक्रम के तहत मंगलवार को जब अमर उजाला संवाद के तहत सेंट एंथोनी इंटर कॉलेज में परिचर्चा का आयोजन हुआ तो सभी ने बेबाकी से कहा कि हमारा जनप्रतिनिधि स्वच्छ, ईमानदार छवि का होने के साथ ही पढ़ा-लिखा होना चाहिए। ऐसा प्रतिनिधि हो जो सदन में हमारी भावनाओं को शब्द दे सके। तराई से पिछड़ेपन को हटा सके। साथ ही रोजगार के संसाधनों का सृजन कर सके।
शहर के सिविल लाइंस स्थित सेंट एंथोनी इंटर कॉलेज में अमर उजाला कैंपस अड्डे में छात्र-छात्राओं से संवाद स्थापित किया गया। जिसमें छात्रों ने बेबाकी से सवालों के जवाब देते हुए स्वच्छ, ईमानदार तथा पढ़े-लिखे नुमाइंदे को सदन पहुंचाने की बात कही।
कार्यक्रम में जब बेरोजगारी के मुद्दे पर कुरेदा गया तो सभी ने बेबाकी से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। आजादी के बाद से अब तक जनप्रतिनिधियों से मिली उपेक्षा की पीड़ा सभी के चेहरों पर झलक रही थी। कुछ लोगों ने तराई को पिछड़ेपन से उबारने की वकालत की तो कुछ लोगों ने कहा कि प्रतिवर्ष स्कूल, कॉलेजों से शिक्षित होकर निकल रहे बेरोजगारों के लिए रोजगार का सृजन करने वाले नुमाइंदे की जरूरत है।
ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए, जो अंगूठा टेक न हो। बेरोजगारों की भावनाओं को समझे और उन्हें सदन में आवाज दे सके। सभी ने एक स्वर से कहा कि कोरे आश्वासन देकर क्षेत्र से नदारद रहने वाला जनप्रतिनिधि नहीं चाहिए। संवाद सदन में एकमत यह हुआ कि हमें राजनीतिज्ञ जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं से सरोकार रखने वाला नुमाइंदा मिलना चाहिए।