बीमार बहू के इलाज के लिए खाते से रुपये निकालने के लिए चार दिन से बैंक के चक्कर लगा रही एक महिला की जान चली गई। प्रसूता बहू के इलाज को लेकर चिंतित महिला शुक्रवार दोपहर चौथी बार बैंक से निराश होकर लौटते वक्त गश खाकर गिरी और जब तक लोग उसे अस्पताल पहुंचाते, उसके जीवन की डोर टूट गई।
कैसरगंज क्षेत्र में चिलवा संग्रामपुर निवासी बिटाना (55) पत्नी स्वर्गीय राम नरायन विधवा पेंशन धारक थी। बिटाना की बहू शांति को चार दिन पूर्व प्रसव हुआ है। उसके बाद से बीमार शांति को इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी। बिटाना कैसरगंज स्थित इलाहाबाद बैंक में अपने खाते से रुपये निकालने के लिए चार दिन से चक्कर लगा रही थी।
कैश की कमी के चलते उसे लगातार निराश होकर लौटना पड़ रहा था। शुक्रवार सुबह बिटाना फिर बैंक पहुंची लेकिन कैश नहीं होने से निराश होकर दोपहर में घर लौट रही थी। बैंक से कुछ दूर रास्ते में वह गश खाकर गिर गई। आसपास के लोगों ने उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना घर पहुंची तो कोहराम मच गया।
परिवारीजनों के मुताबिक बिटाना ने पिछले दिनों ही जमीन का एक टुकड़ा बेचा था। उससे मिले 30 हजार रुपये बैंक खाते में जमा थे। इसके अलावा विधवा पेंशन का कुछ पैसा भी खाते में था। बिटाना के अंतिम संस्कार के लिए भी घर में पैसा नहीं था। बहू शांति व मृतका के छोटे पुत्र देशराज ने पैसे नहीं होने की बात ग्रामीणों को बताई। ग्रामीणों ने चंदा लगाकर रुपये एकत्र किए तब बिटाना के अंतिम संस्कार का इंतजाम हुआ।