बहराइच। किसानों के लिए इनकम का डबल डोज अमेरिका से भारत आई नेपियर घास अब पूरे प्रदेश के सभी जिलों में उगाई जाएगी। बहराइच डीएम के इस प्रयास को प्रदेश में लागू करने के लिए मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा ने आदेश जारी किया है। जिले में इस समय करीब सात सौ एकड़ भूमि में नेपियर घास उगाने का काम किसान कर रहे है।प्रदेश में दुग्ध उत्पादन अर्थात डेयरी उद्योग से जुड़ी काफी संभावनाएं है। हालांकि घास के अभाव में कई बार पशुपालक पशुओं को छुट्टा छोड़ देते हैं जबकि यही पशु दुग्ध उत्पाद के साथ जैविक खाद के रूप में आमदनी का नया जरिया दे सकते हैं। ऐसी चुनौतियों को दूर करने के लिए बहराइच डीएम डॉ दिनेश चंद्र ने ने एक ऐसी पहल की है जो किसानों और पशुपालकों की तकदीर बदल सकती है। अब बहराइच का ये घास का मॉडल पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।
खास बात यह है कि ये मुहिम घास यानी स्थानीय भाषा में कहें तो पशुओं को खिलाए जाने वाले चारे से जुड़ी है। सबसे पहले डीएम डॉ दिनेश चन्द्र ने अपने सरकारी आवास की जमीन पर अपने हाथों अमेरिकन घास (नेपियर ग्रास) उगाई। इसके बाद डीएम के प्रयास से इसके लिए किसान आगे आए और अब जिले में करीब सात सौ एकड़ भूमि में नेपियर घास उगाने का काम किया जा रहा है।
नेपियर घास की खासियत
- एक बार लगाने के बाद लगभग चार से पांच वर्षों तक साल भर में तीन से चार बार कटाई की जा सकती है।
- नेपियर घास में 12 से 14 प्रतिशत तक प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है जो पशुओं के लिए लाभदायक है।
- इस घास को छोटे सी जगह तथा मेंड़ पर भी बोया जा सकता है, यानी बडे किसानों से लेकर छोटे किसान भी इसे उगा सकते हैं।
- नेपियर घास सर्वप्रथम वर्ष 1901 में दक्षिण अमेरिका में उगाई गई थी जबकि भारत में पहली बार 1912 में इसकी बोआई की गई थी।
- अब तक जानकारी के अभाव में कृषक इसकी ओर आकर्षित नहीं हो सके। बोआई के लिए उपयुक्त समय वर्षा ऋतु है।
जिले में इस समय करीब सात सौ एकड़ भूमि में नेपियर घास उगाई जा रही है। किसान नेपियर घास उगाने के लिए आगे आ रहे हैं। इसके लिए किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है।
टीपी शाही, उपकृषि निदेशक
हमारे जिले का नेपियर घास मॉडल अब पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। मुख्य सचिव के स्तर से वीसी में इसका आदेश जारी किया गया है। नेपियर घास उगाकर किसान अपनी आय भी बढ़ा सकते है। इसके लिए लगातार किसान आगे भी आ रहे है।
डॉ. दिनेश चंद्र, डीएम