बहराइच। 17 साल पहले चरस रखने के आरोप में जेल भेजे गए युवक के प्रकरण की जांच कर रही सीबीसीआईडी ने छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में सीबीसीआई ने छह पुलिसकर्मियों को दोषी बनाया है। इनमें से एक पुलिस कर्मी की मौत हो चुकी है। राज्यपाल के आदेश पर सीबीसीआईडी ने एनडीपीएस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। आरोपी पुलिसकर्मियों को हाईकोर्ट व सुप्रीमकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। अब पीड़ित के पिता ने सुकून महसूस किया है।
नवाबगंज थाने में साल 2003 में तत्कालीन थाना प्रभारी परशुराम दोहरे ने 14 जून 2003 को नेपाल बॉर्डर से एक किलो नेपाली चरस बरामदगी दिखाते हुए सरफराज को जेल भेजा था। इस मामले में तत्कालीन विवेचक श्रीनाथ यादव ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी सरफराज के विरुद्ध न्यायालय पर आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया। आरोपी सरफराज के पिता इजहार अहमद ने मामले को फर्जी बताते हुए यूपी शासन से मामले की सीबीसीआईडी से दोबारा जांच की मांग की।
गृह विभाग के अनुसचिव गिरिजा शंकर त्रिवेदी के आदेश पर सीबीसीआईडी के तत्कालीन इंस्पेक्टर निहाल प्रसाद ने जांच शुरू की और अपनी 18 माह चली विवेचना के बाद मामले को फर्जी करार देते हुए आरोपी सरफराज को आरोप मुक्त कर दिया।
उस मामले में शामिल थाना प्रभारी परशुराम दोहरे समेत सभी छह पुलिस कर्मियों को सरफराज के विरुद्ध साजिश कर मुकदमा दर्ज करने व अज्ञात एक किलो नेपाली चरस फर्जी तौर से उसके पास बरामद कराने का दोषी माना गया।
सभी के विरुद्ध उसी थाना नवाबगंज में 19 फरवरी 2005 को मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
नवाबगंज कस्बे में सरफराज रेस्टोरेंट नाम से चाय नमकीन व मिठाई की दुकान चलाता था और उसी की दुकान के बगल की एक लड़की से प्रेम संबंध होने के कारण दोनों 10 जून 2003 को नवाबगंज छोड़कर बहराइच शहर के महोलीपुरा कस्बे रहने के लिए चले आए। नाराज लड़की के पिता ने तत्कालीन यूपी सरकार के एक मंत्री से अपनी बेटी की बरामदगी कराने के लिए अपील की। नवाबगंज पुलिस के तत्कालीन थाना प्रभारी परशुराम दोहरे ने थाने पर बिना एफआईआर दर्ज किए 16 जून 2003 को महोलीपुरा कस्बे से सरफराज वा उसकी कथित पत्नी को हिरासत में ले लिया और पुलिस अभिरक्षा में थाने ले आए। जहां उन्होंने लड़की को उसके पिता के सुपुर्द कर दिया, जबकि आरोपी सरफराज को पुलिस लॉकप में बंद कर प्रताड़ित करना शुरू किया, यहां तक कि उसकी चाय की दुकान तक तोड़ डाली।
18 जून 2003 को थाना प्रभारी परशुराम दोहरे ने कांस्टेबल राम शब्द यादव, कांस्टेबल अनूप कुमार सिंह, आरक्षी लाल चंद वर्मा वा थाने की पुलिस जीप के चालक अभिमन्यु पांडे के साथ सरफराज के पास एक किलो नेपाली चरस की बरामदगी दिखाकर मुकदमा दर्ज कर सरफराज को जेल भेज दिया।
जब सीबीसीआईडी ने एफआईआर दर्ज की तो आरोपी पुलिसकर्मी एफआईआर निरस्त कराने के लिए हाईकोर्ट चले गए। जहां एक लंबे अंतराल के बाद 30 सितंबर 2019 को हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। अपील खारिज होने के बाद आरोपी थाना प्रभारी परशुराम दोहरे ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। जहां सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी 25 नवंबर 2019 को उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद सीबीसीआईडी ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के पास आरोपी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध न्यायालय पर मुकदमा चलाए जाने की अनुमति मांगी। सीबीसीआईडी की जांच को सही मानते हुए राज्यपाल ने भी अनुमति दे दी। राज्यपाल की अनुमति मिलने के बाद सीबीसीआडी ने बीते 22 दिसंबर 2022 को बहराइच के जिला एवं सत्र न्यायालय स्थित एनडीपीएस कोर्ट पर मामले के पांच आरोपी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। वाहन चालक अभिमन्यु पांडेय की मृत्यु हो जाने के कारण उन्हे छोड़ दिया गया है।
17 साल बाद न्यायालय पर चार्जशीट दाखिल की गई तो पीड़ित सरफराज के पिता ने संतोष जाहिर किया है। पीड़ित के अधिवक्ता अब्दुल अजीज खां ने बताया कि इस मामले में आरोपी पुलिस कर्मियों में तत्कालीन थाना प्रभारी परशुराम दोहरे ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। तत्कालीन एसआई अब प्रोन्नति पाकर इंस्पेक्टर बन गए हैं और तत्कालीन कांस्टेबल एसआई बन गए हैं। अब चार्जशीट फाइल हो गई है तो इजहार को भी यकीन हो चला है कि उन्हें न्याय मिल जाएगा।