दस हजार में नोएडा-गुड़गांव जाने को तैयार दिखे युवा
- रोजगार मेले में उमड़ी भीड़, 192 युवाओं को मिला रोजगार, 17 कंपनियों ने लगाए स्टॉल
- नानपारा, रुपईडीहा, मोतीपुर व जरवलरोड से पहुंचे युवा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच। बेरोजगारी के मारे नौजवान शुक्रवार को आईटीआई परिसर में लगे रोजगार मेले में हालात से समझौता करते दिखे। मात्र दस हजार रुपये की नौकरी के लिए नोएडा, फरीदाबाद व गुड़गांव समेत अन्य महानगरों में जाने की होड़ दिखी। कड़ाके की ठंड के बीच सुबह से ही युवा अंकपत्र व अन्य प्रमाण पत्र लेकर काफी संख्या में पहुंचने लगे। कंपनियों के स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधियों ने उनके प्रपत्र जांचे और काउंसिलिंग की। देर शाम तक 355 अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग कर 192 को रोजगार के अवसर मुहैया कराए गए।
नानपारा रोड स्थित आईटीआई परिसर में शुक्रवार को रोजगार मेले का आयोजन किया गया। इसमें सिप्ला आर्युवेद, डीएमडी इंडिया प्राईवेट लिमिटेड, महिंद्रा ऑटो, टाटा मोटर्स, एल एंड टी, एचडीएफसी इंडिया व पेटीएम समेत 17 कंपनियों ने स्टॉल लगाए। बेरोजगारी का दंश झेल रहे उच्च शिक्षित युवा रोजगार मेले में लगे स्टॉलों पर सुबह से ही कतारबद्ध दिखे। इनमें से काफी संख्या में युवा नानपारा, रुपईडीहा, मोतीपुर व जरवलरोड समेत अन्य दूरस्थ स्थानों से सुबह ही पहुंच गए थे। आंखों में यही ललक दिखी कि बस किसी तरह रोजगार मिल जाए। कई कंपनियों के प्रतिनिधियों ने युवाओं को चार से छह माह का प्रशिक्षण देने के बाद वेतनमान देने का प्रस्ताव भी रखा। किसी कंपनी ने दस तो किसी ने 12 हजार रुपये पर महानगरों में रोजगार देने की शर्त रखी। युवाओं ने मजबूरी में प्रस्ताव स्वीकार भी कर लिया। वहीं, काफी संख्या में युवाओं को आवश्यक प्रपत्रों के अभाव में तो किसी को रोजगार न मिलने के कारण लौटना पड़ा। रोजगार मेले का शुभारंभ एमएलसी डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने किया। उन्होंने चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र भी वितरित किए। किसी कारणवश चयनित न होने वाले युवाओं से निराश न होते हुए फिर प्रयास करने की बात कही। इस अवसर पर ऊधव राम, डीके त्रिपाठी, संजय श्रीवास्तव, हर्षिता पाठक, अलका श्रीवास्तव समेत काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जिले में नहीं हैं अवसर
जिला औद्योगिक दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ है। यहां कल कारखानों के अभाव के कारण युवाओं के लिए पर्याप्त मात्रा में रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अधिकांश युवा अपने घर से दूर जाकर नौकरी करने के लिए विवश हैं। कंपनियां भी युवाओं की इस मजबूरी का लाभ उठाते हुए काफी कम वेतनमान पर रोजगार दे रही हैं।
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- रमेश कुमार।
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अनुभव के बाद बढ़ेंगे अवसर
स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर काफी कम हैं। ऐसे में शिक्षित युवाओं में स्पर्धा भी अधिक है। नौकरी पाने के लिए सभी प्रयास कर रहे हैं। कम पैसों में भी महानगर जाने से यह लाभ मिल सकता है कि अनुभव बढ़ने पर वेतनमान बढ़ सकता है या फिर कोई और कंपनी चुनी जा सकती है।
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अमित कुमार।
कंपनियां कर रहीं शोषण
अधिकांश निजी कंपनियां बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर पहले कुछ माह प्रशिक्षण देने की बात कही जा रही है। चार से पांच माह तक प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए युवाओं को रहने व खाने की व्यवस्था भी अपने पास से करनी होगी। इसके बाद नौकरी मिलेगी या नहीं इसका भी कोई भरोसा नहीं।
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सुमित गुप्ता।
युवाओं को कर रहे पारंगत
युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें युवाओं को विभिन्न ट्रेड में पारंगत किया जा रहा है। युवा कौशल विकास के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर विभिन्न क्षेत्रों में अपना करियर बना सकते हैं। उन्हें कौशल विकास योजना का लाभ उठाने के लिए आगे आना चाहिए।
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सीमा, प्रशिक्षिका।
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युवाओं को बना रहे दक्ष
कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं के लिए खासा लाभप्रद है। प्रशिक्षण के माध्यम से किशोर-किशोरियों को प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें रोजगार प्राप्त करने के साथ ही स्वरोजगार अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। वे स्वयं रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकते हैं।
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- पूनम, प्रशिक्षिका।
ऊंचाई हासिल कर सकते युवा
कुछ कंपनियों की ओर से शुरुआत में कम वेतनमान दिया जा रहा है। युवा अनुभव प्राप्त कर व कड़ी मेहनत के बूते ऊंचा मुकाम हासिल कर सकते हैं।
- संजय कुमार, जिला सेवायोजन अधिकारी।