बहराइच। कृषि विज्ञान केंद्र द्वितीय, नानपारा पर शनिवार को कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. केएम सिंह ने की। गोष्ठी में वैैैज्ञानिकों ने किसानों को उत्पादन बढ़ाने के तरीके बताए। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र, प्रथम बहराइच पर लहसुन उत्पादन के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कृषक गोष्ठी में मौजूद किसानों को संबोधित करते हुए कृषि वैज्ञानिक केएम सिंह ने बताया कि किसान परंपरागत तरीके छोड़ दें तो उत्पादन में वृद्धि होगी और आय बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि गेहूं की बोआई के दौरान किसानों को प्रति एकड़ 50 किलो डीएपी, 25 किलो एमओपी व 25 किलो यूरिया का प्रयोग करना चाहिए। वहीं, किसान 150 किलो सिंगल सुपर फास्फेट, 25 किलो एमओपी व 50 किलो यूरिया के मिश्रण का प्रयोग भी बेहतर उत्पादन के लिए कर सकते हैं।
किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए खेतों में पराली जलाने के बजाए 10 प्रतिशत यूरिया का घोल बनाकर इस पर छिड़काव करना चाहिए। ऐसा करने से पराली भी खाद बनकर खेत की उर्वरा शक्ति में वृद्धि करती है। उन्होंने किसानों को धान कटाई के दौरान सुपर एसएमएस लंगी कंबाइन मशीन का प्रयोग करने की हिदायत दी। पादप प्रजनन वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार व डॉ. वीपी सिंह ने किसानों को गेहूं के बेहतर उत्पादन वाली प्रजातियों के बारे में बताया।
कृषि विज्ञान केंद्र, प्रथम पर शनिवार को कृषि वैज्ञानिक वीपी शाही ने किसानों को लहसुन की खेती के तरीके बताए। उन्होंने बताया कि लहसुन से अच्छा उत्पादन हासिल करने के लिए किसानों को बड़े क्लोब (जवा) की रोपाई करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि भारतीय बागवानी अनुसंधान प्रतिष्ठान करनाल से लहसुन की प्रजाति मंगाकर पांच किसानों के यहां प्राकृतिक खेती के तहत लगाया गया है। इस दौरान अनिरुद्ध यादव, राम सेवक वर्मा, अमरीश कुमार मौर्य, जगन्नाथ मौर्य आदि मौजूद रहे।