रानीपुर(बहराइच)। रानीपुर थाना क्षेत्र के गौरिया गांव में शुक्रवार को महज पांच हजार रुपये के लेनदेन के विवाद में एक युवक की गला दबा कर हत्या कर दी गई। मृतक की पत्नी की तहरीर के बाद भी पुलिस इस मामले में केस दर्ज करने को लेकर टाल मटोल करती रही। इससे परेशान पीड़िता ने पिता की हत्या से अनाथ हुए छह बच्चों के साथ एसपी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। एसपी केशव कुमार चौधरी ने इसे गंभीरता से लेते हुए रानीपुर थानाध्यक्ष को तत्काल मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया।
रानीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत गौरिया के हर्राजपुर निवासी राम छबीले मौर्या (39) वाहन चालक का काम करता था। पत्नी सुषमा व बेटी नेहा मौर्य ने बताया कि बीते शुक्रवार की शाम लगभग पांच बजे गांव निवासी झन्नू यादव व पवन यादव मृतक छबीले को अपने साथ बाइक पर बैठाकर ले गए थे। जहां पहले से मौजूद नंगू यादव, रामपाल यादव व गुरुदीन के मिलकर सभी ने शराब पी। इसी दौरान पांच हजार के पुराने लेनदेन को लेकर विवाद होने लगा। परिजनों का आरोप है कि विवाद इतना बढ़ गया कि पांचों लोगों ने मिलकर पहले छबीले का मारापीटा और फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। बाद में घबरा कर अफवाह फैला दी कि उसकी मौत शराब पीने से हुई है।
मृतक की पत्नी ने रानीपुर पुलिस पर इस मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। बताया कि हत्या की सूचना तत्काल देने के बाद भी पुलिस दो घंटे बाद मौके पर पहुंची और बमुश्किल शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इतना ही नहीं लिखित तहरीर देने के 15 घंटे बाद भी रानीपुर पुलिस ने इस मामले में कोई मुकदमा तक लिखा।
रानीपुर पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज न होने पर मृतक की पत्नी सुषमा मौर्या अपने अनाथ हुई बच्चों के साथ एसपी कार्यालय पहुंची और न्याय दिलाने की गुहार लगाई। इसके बाद ही एसपी केशव कुमार चौधरी ने रानीपुर थानाध्यक्ष को इस मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज कर दोषियों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया। दूसरी तरफ रानीपुर थानाध्यक्ष शिवनाथ गुप्ता ने परिजनों के आरोपों को गलता बताते हुए कहा कि रात में किसी ने भी हत्या का कोई आरोप नहीं लगाया था। इसी लिए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था। अब परिजनों ने पांच लोगों को नामजद करते हुए तहरीर दी है। इसके आधार पर मुकदमा पंजीकृत कर आरोपियों की धरपकड़ को कार्रवाई की जा रही है।
मृतक के बड़े भाई ने बाबूलाल ने बताया कि रामछबीले ने अपनी जिम्मेदारी पर पवन को नंगू से 12 हजार रुपया उधार दिलाया था। जो ब्याज जोड़कर वर्तमान में 26 हजार हो गया था। इसमें से 21 हजार रुपया नंगू को चुकाया जा चुका था। बस पांच हजार रुपया ही देना बाकी था। इसी को लेकर नंगू ने रामछबीले की बाइक भी छीन ली थी। आरोप लगाया कि लेनदेन के इसी विवाद में सभी आरोपियों ने रामछबीले को पहले शराब पिलाई और फिर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी।
मृतक रामछबीले की छह बेटियां थी, जो हत्या के बाद अनाथ हो गयी। रामछबीले की हत्या की सूचना के बाद से ही पत्नी सुषमा के साथ ही पुत्री नेहा (14), श्रद्धा (13), अर्चना (10), राशि (8) व प्रिया (6) का रो-रो कर बुरा हाल है। सबसे छोटी लड़की आरुषि अभी सिर्फ एक साल की है। उसे तो पता भी नहीं कि उसके सिर से पिता का साया उठ गया है।