बहराइच। मनरेगा के तहत संचालित कार्यों की रफ्तार गतिमान नहीं हो पा रही है। इसके चलते ही स्वीकृति के बाद भी जिले में वर्षा जल संरक्षण के लिए बननने वाले 209 अमृत सरोवर का निर्माण अधर में अटक गया है। शासन की प्राथमिकता में शामिल होने के बावजूद अमृत सरोवरों से जुड़ा निर्माण कार्य फिलहाल बंद है। विभागीय जिम्मेदार इसके लिए बेमौसम हुई बारिश व बाढ़ को कारण बता चुप्पी साधे हैं। क्षेत्रीय ग्रामीण अब पुन: इस परियोजना का कार्य शुरू होने पर इसकी निर्माण लागत में वृद्धि हो जाने की आशंका जता रहे हैं।
भूमिगत जल बढ़ोत्तरी और वर्षा जल संरक्षण के लिए सरकार की ओर से पहले चरण में मनरेगा के तहत 75 अमृत सरोवरों के निर्माण का कार्य पूरा हो जाने के बाद शासन की ओर से द्वितीय चरण में 209 अमृत सरोवरों के निर्माण का लक्ष्य दिया गया था। मनरेेगा विभाग की ओर से स्वीकृत बजट खर्च के बाद सरोवर की खुदाई और बाहरी फाउंडेशन का कार्य काफी हद तक पूर्ण भी हो गया है। 15 अगस्त से पूर्व डीसी मनरेगा केडी गोस्वामी ने सरोवरों की खुदायी का कार्य 80 प्रतिशत पूर्ण हो जाने का दावा भी किया था। इसके बावजूद दूसरे चरण में प्रस्तावित 209 अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य अभी तक बीच में ही अटका है।
सरकार की ओर से अमृत सरोवरों का निर्माण ग्रामीण पर्यटन क्षेत्र को विकसित किए जाने के उद्देश्य से कराया जा रहा है। अमृत सरोवरों के चारो ओर टहलने के जॉगिंग ट्रैक, सरोवर के पास बैठने के लिए बैंच, सुंदर खुशबुदार सदाबहार फूलों की फुलवारी आदि के निर्माण के साथ इन्हें शहरों की तर्ज पर विकसित करना था। इन सरोवरों के निर्माण कार्य पर लगे ब्रेक से ग्रामीणों में मायूसी छाई है।
मनरेगा योजना के तहत बन रहे सभी 209 अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य पूर्ण करवाया जाना था। इस दौरान बेमौसम हुई अतिवृष्टि व बाढ़ आदि के कारण फिलहाल निर्माण कार्य रुका हुआ है। मौसम अनुकूल होते ही अधूरे पड़े निर्माण को पूर्ण करवाया जाएगा।
केडी गोस्वामी, डीसी मनरेगा