बहराइच। मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों से जुड़े यह चंद मामले बेहतर सुविधा के साथ ही मुफ्त दवाएं मुहैया कराने के सरकारी दावों को फिलहाल कागजी साबित करते हैं। शासन स्तर से दवाओं की खरीद फरोख्त पर लाखों का बजट खर्च करने के बावजूद मेडिकल कालेज में मरीजों को जरूरी दवाएं नहीं मिल रही हैं। निर्देश के बाद भी यहां की ओपीडी में मौजूद डॉक्टर मरीजों को बाहर मिलने वाली महंगी ब्रांडेड दवाएं ही पर्चे पर लिख कर दे रहे हैं। इसके चलते ही बुखार से लेकर पेटदर्द तक की दवा मरीजों को बाहर से खरीदने की परेशानी उठानी पड़ रही है।
महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं महर्षि बालार्क जिला चिकित्सालय के निर्माण के बाद जिले के सुदूर गांवों में रहने वाले ग्रामीणों में सस्ते व बेहतर इलाज की आस जगी थी। इस बात की भी खुशी थी कि बेहतर इलाज के लिए अब उन्हें लखनऊ तक की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी और यही उन्हें सस्ता इलाज मिल सकेगा। लेकिन विभागीय जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते मरीजों को इसका लाख मिलता नहीं दिख रहा है और मरीजों को अब भी मंहगी दवाओं का ही सहारा है।
मरीजों को ओपीडी में बाहर के मेडिकल स्टोरों की दवाएं लिखी जा रही हैं। यहीं नहीं मरीजों की माने तो कुछ चिकित्सक दवा लाकर दिखाने तक की बात कहते हैं। ऐसा तब है, जब औषधि भंडार में 200 से अधिक दवाओं के होने का दावा किया जाता है। मरीजों की माने तो हर पांच दवाओं में दो दवाएं बाहर के मेडिकल स्टोर की लिखी जाती हैं। वहीं मरीजों द्वारा दवा न लेने की बात कहने पर सरकारी दवाओं से फायदा न होने की भी बात कही जाती है।
मेडिकल कॉलेज के वार्डों में भर्ती मरीजों पर भी मच्छर जनित बीमारियों के प्रकोप का खतरा मंडरा रहा है। निकासी न होने से वार्ड की तरफ पानी का भराव कायम बना रहने से मच्छरों का प्रकोप मरीजों को काफी परेशान करता है। इलाज करा रहे कैसरगंज के हनीफ ने बताया कि अस्पताल में मच्छरों का प्रकोप रहता है। दिन के समय भी मच्छर काटते रहते हैं। परिसर में भी साफ सफाई की उचित व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में डेंगू से निपटने के लिए 10 बेड का वार्ड आरक्षित कर दिया गया है। अब तक डेंगू से पीड़ित 15 मरीज वार्ड में भर्ती हो चुके हैं। अस्पताल कर्मियों की लापरवाही से परिसर में बनी कई पानी की टंकियों से टोटी गायब हो जाने के कारण शुद्ध पेयजल का रिसाव भी लगातार होता रहता है।