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पहले सूखा, अब अतिवृष्टि... कराह रहा किसान

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बहराइच। मंगलवार देर रात शुरू हुई मूसलाधार बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 58 घंटों में जिले में 223 एमएम बारिश दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिक भी 10 अक्तूबर तक बारिश जारी रहने का अनुमान जता रहे हैं। पहले ही सूखे की मार से बेहाल किसान प्रकृति की इस दोहरी मार से कराह रहा है। सैकड़ों हक्टेयर धान व गन्ने की फसल खेतों में धराशाई हो गई है। इससे धान को 50 प्रतिशत व गन्ने को 30 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। खेतों में पानी भरने से दहलनी फसलों व सब्जियों को 80 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है।
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बीते 58 घंटों में 223 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह अक्तूबर माह में बीते दस सालों में हुई सबसे ज्यादा बारिश है। मंगलवार की रात से बुधवार तक 40 एमएम बारिश दर्ज की गई। बृहस्पतिवार को 96.5 एमएम और शुक्रवार को 86.5 एमएम बारिश दर्ज की गई। बारिश का सिलसिला रुक-रुक कर शुक्रवार को भी दिनभर जारी रहा। खेतों में भीषण जलभराव हो गया है।
महसी तहसील के सिपहिया हुलास निवासी किसान आदित्या शुक्ला की गन्ना और विनय शुक्ला, दिनेश, रामदयाल, मुरारी निषाद आदि की धान की फसल गिर गई है। वहीं, भग्गड़वा के किसान सलमान खान, विक्रम सिंह, संजय गुप्ता, मैनेजर सिंह, अमरेंद्र सिंह व हुजुरपुर के शिवकुमार पांडेय, प्रदीप चौहान, बैजनाथ आदि की धान व गन्ने की फसल खेतों में गिर गई है। किसानों का कहना है कि धान को 50 प्रतिशत तो गन्ने में 30 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है।
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मिहींपुरवा तहसील के सेमरहना निवासी सब्जी किसान रामप्रवेश, परवानी गौढ़ी निवासी शिवशंकर सिंह, भज्जापुरवा निवासी अंबरलाल व गंगापुर निवासी रमेश मौर्य ने बताया कि खेतों में लगी लौकी, कद्दृ आदि की फसलों में पानी भर जाने से 80 प्रतिशत तक नुकसान होगा। हुजूरपुर निवासी किसान रामतेज ने बताया कि उन्होंने उड़द की फसल बोई थी जिसमें फूल निकल रहे थे। बारिश के चलते पूरी फसल चौपट हो गई।
कैसरगंज तहसील के देवलखा निवासी किसान राघवराम वर्मा ने बताया कि बारिश न होने पर महंगे डीजल से पंप चलाकर किसी तरह उपज को बचाया था। अब जरूरत नहीं है तो झमाझम बारिश ने सब चौपट कर दिया। शिवकुमार मौर्य ने बताया कि गलत समय पर हुई बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। उधार लेकर मूली, पालक, धनिया, गोभी आदि की फसलें बोई थीं, लेकिन पानी भरने से सब बर्बाद हो गया। रिसिया निवासी किसान सुरेश प्रताप सिंह, राजेश तिवारी , मनोज कुमार, वसीम शेरवानी, मटेरा के किसान संतोष कुमार, राधेश्याम, विनय कुमार व राम कुमार आदि भी फसलें खराब होने को लेकर चिंतित दिखे।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक वीपी शाही ने बताया कि यह बारिश सभी फसलों के लिए नुकसानदायक है। खेतों में गिरी धान की फसल की बालियों के परिपक्व होने में दिक्कत आएगी। 30 प्रतिशत दाने खाली (फरहा) रह जाएंगे। गन्ने की फसल को भी 50 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। जिन किसानों ने लाही की बोआई कर दी थी, उनके खेतों में पानी भरने से अंकुर नहीं फूटेंगे। खेतों में पानी भरने से उड़द, मूंग व अरहर की फसल को भी भारी क्षति होगी। सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को भी नुकसान होगा। पानी भरने से 80 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि किसान बारिश बंद होते ही जल्द से जल्द खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था करें।
आलू की बोआई अमूमन 15 अक्तूबर से नवंबर के पहले सप्ताह तक की जाती है। बीते तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते खेतों में पानी भरने से नमी की अधिकता हो गई है। इस वजह से बोआई लगभग 20 दिन पिछड़ जाएगी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीपी शाही ने बताया कि खेतों में नमी की अधिकता के चलते नवंबर के प्रथम सप्ताह से बोआई शुरू हो पाएगी।
जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडे ने बताया कि जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है। किसान तत्काल बीमा कंपनी को सूचना दें। उन्होंने बताया कि जिले में 1.12 लाख किसान फसल बीमा से आच्छादित हैं। सभी किसान 72 घंटे के अंदर बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर 18008896868 पर फोन कर सूचना दे दें। तहसीलों में मौजूद बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों को भी शिकायती पत्र देकर नुकसान की जानकारी दे सकते हैं।
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