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डीएम की सख्ती बेअसर, अटका मैत्री द्वार का निर्माण

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रुपईडीहा(बहराइच)। भारत नेपाल सीमा पर मित्रता की धरोहर के बतौर बनने वाला मैत्री द्वार का निर्माण जिम्मेदारों की लापरवाही से अटका पड़ा है। डीएम की सख्ती के बाद भी अभी तक इसका निर्माण कार्य तक शुरू नहीं हो पाया है। बीते माह 29 अगस्त का डीएम डॉ. दिनेश चंद्र की अध्यक्षता में हुई बैठक में लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने मैत्री द्वार के निर्माण कार्य को शुरू कराने के लिए दस दिनों की मोहलत मांगी थी। विभागीय अभियंता आवंटित जमीन न मिल पाने के कारण ही निर्माण कार्य शुरू होने में देरी की बात कह रहे हैं।
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इस मैत्री द्वार का निर्माण कार्य शुरू होने की जानकारी डीएम द्वारा स्वयं अगस्त माह में हुई बैठक के दौरान प्रस्तावित द्वार का नक्शा दिखाने के साथ दी गयी थी। सीमा क्षेत्र की पहचान के लिए बनने वाले भव्य द्वार को लेकर हर कोई उत्साहित था। बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों में भी इस बात को लेकर खुशी थी अब विदेशी नागरिक भी भारतीय सीमा को दूर से पहचान सकेंगे लेकिन इसका निर्माण कार्य अभी तक शुरू न हो पाने से सभी में मायूसी है। निर्माण कार्य शुरू होने में हो रही देरी पर कस्बे के व्यापारी सुशील बंसल व व्यापार मंडल के कोषाध्यक्ष अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष विजय मित्तल आदि का कहना है कि डीएम के सख्त निर्देश के 25 दिन बाद भी मैत्री द्वार के निर्माण का कार्य शुरू न होना लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदारों की घोर लापरवाही व मनमानी दर्शाता है।
इस संबंध में जब लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर अंकित वर्मा व संबंधित लेखपाल करुणेश त्रिपाठी ने बातचीत की गयी तो उन्होंने बताया कि मैत्री द्वार के निर्माण को लेकर जमीन का आवंटन पूरी तरह न होने से ही निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। बताया गया कि गेट निर्माण के लिए जहां सर्वे किया गया है, वहां अभी तक चिह्नित जमीन नहीं मिल सकी है। भूमि अधिग्रहण के बाद ही मैत्री द्वार का निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।
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