बहराइच। अपहरण व दुष्कर्म के मामले में 24 साल बाद बुधवार को बिटिया को इंसाफ मिला। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी मानते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 17 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
एडीजीसी, क्रिमिनल गिरीश चंद्र शुक्ला ने बताया कि श्रावस्ती के एक गांव निवासी वादी मुकदमा ने देहात कोतवाली में 31 मार्च, 1998 को तहरीर दी थी। इसके आधार पर देहात कोतवाली क्षेत्र के इमलिया गांव निवासी दिनेश व रामसनेही और श्रावस्ती के गिलौला निवासी कमलेश कुमार के खिलाफ 15 वर्षीय बेटी के अपहरण व दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था। एडीजीसी, क्रिमिनल ने बताया कि बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट, प्रथम मनोज कुमार मिश्रा के न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई हुई।
इस दौरान अभियुक्त रामसनेही की मृत्यु हो जाने के चलते उसके विरुद्ध वाद की कार्रवाई उपशमित कर दी गई। कमलेश कुमार को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। दिनेश को दोषी सिद्ध करते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। एडीजीसी क्रिमिनल ने बताया कि न्यायाधीश ने अर्थदंड की रकम में से 15 हजार रुपये पीड़िता को देने व शेष धनराशि राजकीय कोष में जमा करने का निर्देश दिया है। अर्थदंड अदा न करने पर दिनेश को दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।