महसी (बहराइच)। नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बरसात से जनपद के बैराज पानी से लबालब हो गए हैं। नतीजतन बैराजों से पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण घाघरा नदी उफनाने लगी है। नतीजतन महसी तहसील क्षेत्र के निचले स्थानों पर बसे छह गांवों में पानी घुस गया है जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। घाघरा का जलस्तर बढ़ता देख ग्रामीणों को बाढ़ का डर सता रहा है। आवागमन में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व कर्मी भी नजरें जमाए हुए हैं ताकि स्थिति गंभीर होने पर राहत व बचाव के कार्य तेज किए जा सकें।
महसी क्षेत्र में प्रति वर्ष आने वाली बाढ़ से लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को विवश होना पड़ता है। प्रति वर्ष आने वाली बाढ़ व कटान से ग्रामीणों को अपनी कृषि योग्य भूमि से भी हाथ धोना पड़ता है। इस बार जनपद में तो अपेक्षाकृत बरसात काफी कम हुई है, लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बरसात से जनपद के बैराज एक बार फिर पानी से लबालब हो गए हैं। इस वजह से बैराजों से पानी घाघरा नदी में डिस्चार्ज किया जा रहा है। बैराजों से डिस्चार्ज पानी से घाघरा एक बार फिर उफनाने की कगार पर है। घाघरा के बढ़ते जलस्तर से तहसील महसी में बसे आधा दर्जन तटवर्ती गांव नयापुरवा, छत्तरपुरवा, जोगलापुरवा, नगेसरपुरवा, तारापुरवा नई बस्ती व अहिरनपुरवा गांव में पानी भर गया है।
पानी गांव में भरने से ग्रामीण किसी अनहोनी की आशंका के चलते सहमे नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण घाघरा नदी का जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। गांवों में पानी भरने से आवागमन में भी दिक्कतें हो रही हैं। घाघरा का जलस्तर बढ़ने के कारण ग्रामीण खाद्य सामग्री व गृहस्थी का सामान सुरक्षित रखने में जुट गए हैं जिससे अचानक पानी का स्तर बढ़ने से उन्हें परेशानियों का सामना न करना पड़े।
बीते लगभग दस वर्षों में घाघरा की बाढ़ ने न सिर्फ महसी बल्कि कैसरगंज तहसील के हजारों लोगों के सिर से छत छीन ली है। तहसील कैसरगंज के लगभग एक दर्जन गांव पूरी तरह से अस्तित्व विहीन हो चुके हैं। इनमें मुरौवा, मुंसारी, मंगरवल, कपरवल, पटकापुर, सिलौटा, उमरिया व बरुआबेहड़ समेत अन्य तटवर्ती गांवों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। इन ग्रामों में निवास करने वाले हजारों लोग आज भी बेलहा-बेहरौली तटबंध पर झोपड़ियां व पन्नी तानकर किसी प्रकार जीवन यापन कर रहे हैं। इनके पुनर्वास के लिए की गईं घोषणाएं आज भी साकार होने का इंतजार कर रही हैं।
सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम के सहायक अभियंता बीबी पाल ने बताया कि शारदा बैराज से एक लाख 60 हजार 996, गिरिजापुरी बैराज से एक लाख 55 हजार 103 व सरयू बैराज से दो हजार 224 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बिसवां स्पर पर जलस्तर 111.680 मीटर रिकॉर्ड किया गया। यहां खतरे का लाल निशान 112.150 मीटर है। एल्गिन ब्रिज पर घाघरा का जलस्तर 106.016 मीटर रिकॉर्ड किया गया। यहां घाघरा लाल निशान से पांच सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
एसडीएम महसी रामदास ने बताया कि अभी बाढ़ के हालात नहीं हैं। राजस्व कर्मियों को स्थिति का जायजा लेने के लिए क्षेत्र का भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, एसडीएम कैसरगंज महेश कुमार कैथल ने बताया कि जलस्तर बढ़ने से मंझारा तौकली के ग्यारह सौ रेती व भिरगूपुरवा में कटान धीमी है। बाढ़ पर नजर रखी जा रही है।