बहराइच। मनरेगा योजना के तहत तेजवापुर ब्लॉक की मिर्जापुर ग्राम पंचायत में खोदे जा रहे अमृत सरोवर में जिम्मेदारों ने जमकर भ्रष्टाचार किया। जिम्मेदारों ने जेसीबी से तालाब की खोदाई करवाई और कागजों में श्रमिकों से खोदाई दर्ज कर पांच लाख रुपये डकार लिए। मामले का खुलासा डीसी मनरेगा केडी गोस्वामी के औचक निरीक्षण में हुआ। उन्हें निरीक्षण में मौके पर कोई श्रमिक नहीं मिला जबकि कागजों में 70 श्रमिकों का मास्टर रोल निर्गत मिला।
सरकार की ओर से वर्षा जल संरक्षण व भूमिगत जल की बढ़ोतरी के लिए मनरेगा योजना के तहत अमृत सरोवर खुदवाए जा रहे हैं। योजना के तहत तालाब खोदाई का समस्त कार्य मनरेगा श्रमिकों से कराना है ताकि जॉब कार्डधारकों को रोजगार की गारंटी मिल सके। इसके बावजूद जिले में कई स्थानों से जेसीबी से खोदाई करवाने की शिकायतें मिल रहीं हैं। इसी तरह की एक शिकायत पर शुक्रवार को डीसी मनरेगा केडी गोस्वामी ने सहायक अभियंता, पैक्सफेड चंद्र प्रकाश द्विवेेदी व अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी विक्रांत सिंह के साथ तेजवापुर ब्लॉक के मिर्जापुर गांव में बन रहे सम्राट अशोक अमृत सरोवर का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में सरोवर पर कोई भी श्रमिक खोदाई करता नहीं मिला।
इस पर उन्होंने बीडीओ, तेजवापुर हेमंत यादव को सूचना दी। सूचना के आधे घंटे बाद पंचायत सचिव रोहित मौर्य, रोजगार सेवक आलोक तिवारी व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। डीसी मनरेगा की जांच में मौके पर सिर्फ 25 प्रतिशत कार्य ही मनरेगा श्रमिकों से करवाना पाया गया जबकि 75 प्रतिशत खोदाई जेसीबी से करवाना पाया गया। डीसी मनरेगा ने बताया कि अमृत सरोवर की खोदाई जेसीबी से करवाना मनरेगा एक्ट का सीधा उल्लंघन है। अनियमितता में रोजगार सेवक आलोक तिवारी, सचिव रोहित मौर्य व प्रधान जनक दुलारी मौर्य सीधे तौर पर दोषी पाए गये हैं। वहीं, तकनीकी सहायक उपेंद्र नाथ सिंह व बीडीओ हेमंत यादव शिथिल पर्यवेक्षण के दोषी पाए गये हैं।
डीसी मनरेगा केडी गोस्वामी ने बताया कि अमृत सरोवर योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। इसमें भी भ्रष्टाचार करने से लोग चूक नहीं रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोजगार सेवक आलोक तिवारी की सेवा समाप्ति, पंचायत सचिव रोहित कुमार मौर्य पर निलंबन व तकनीकी सहायक उपेंद्र नाथ सिंह पर विभागीय कार्रवाई के लिए डीपीआरओ को पत्र लिखा जाएगा।
प्रधान के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। यही नहीं श्रमिक अंश के पांच लाख रुपये प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक से वसूले जाएंगे। बता दें कि मिर्जापुर गांव में खोदे जा रहे अमृत सरोवर की लागत 25.27 लाख रुपये है। इसमें से 12.38 लाख रुपये श्रमिक अंश है और इसका प्रयोग तालाब की खोदाई पर करना है। जिम्मेदारों ने इसमें से श्रमिक अंश के 677979 लाख रुपये खर्च कर दिए जबकि मौके पर श्रमिकों से मात्र 25 प्रतिशत ही कार्य लिया गया है।
मिर्जापुर में तालाब खोदाई के नाम पर नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं हैं। श्रमिकों से खोदाई न कराकर जेसीबी से कराई गई। मामले में कार्रवाई के लिए डीपीआरओ को पत्र लिखा जाएगा।
- केडी गोस्वामी, डीसी मनरेगा