बहराइच। फखरपुर थाना क्षेत्र में 36 घंटे के अंदर चार शव मिलने से पुलिस की नाकामियां सामने आने लगी हैं। जिस रात घटना हुई है उस रात भी थाने की पुलिस के अलावा डायल 112 की दो गाड़ियां हाईवे की पेट्रोलिंग पर मुस्तैद रहीं। दोनों गाड़ियों में सवार पुलिसकर्मियों ने समय के अनुसार अपनी ड्यूटी भी बजाई। गाड़ी का तेल भी फूंका, लेकिन अपना फर्ज निभाने में चूक गए। अपराध रोकने के लिए मुस्तैद डायल 112 के पुलिसकर्मियों को भी भनक तक नहीं लग सकी और क्षेत्र में चार घटनाएं हो गईं। हत्यारे बेखौफ फरार हो गए। अब पुलिस सिर्फ रटा-रटाया बयान देकर जिम्मेदारी से किनारा कर रही है।
जिले में आमजनमानस की सुरक्षा के लिए थानों के साथ डायल 112 की भी तैनाती है। डायल 112 सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर त्वरित कार्रवाई करती है और बढ़ते मामले को शांत कराकर रफा दफा कराती है जिससे क्षेत्र में शांति बनी रही। यही नहीं अपराध रोकने में डायल 112 के पुलिसकर्मी भी अहम भूमिका निभाते हैं। अधिकतर ये हाईवे पर गश्त करते हुए नजर आएंगे, लेकिन यह जिले का दुर्भाग्य ही रहा कि शुक्रवार व शनिवार की रात हुई घटना की भनक डायल 112 के पुलिसकर्मियों को भी न लग सकी। फखरपुर थाना क्षेत्र में डायल 112 की पीआरवी 1540 व 1541 नंबर की गाड़ियां चलती हैं। वह गश्त भी करती है और अपराध को भी रोकती हैं।
रोजाना की तरह घटना की रात शुक्रवार व शनिवार को भी मुस्तैद रहीं। गाड़ी का तेल भी फूंका होगा और अपनी ड्यूटी भी रौब से निभाई होगी, लेकिन अपराध रोकने में पूरी तरह नाकाम रहीं। शुक्रवार व शनिवार को हत्याकर शव फेंके गए, लेकिन डायल 112 के पुलिसकर्मियों को कोई भनक तक नहीं लग सकी। ऐसे में उनके मुस्तैदी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अपराध रोकने के लिए चीता मोबाइल भी चलाया जा रहा है। एक बाइक पर दो पुलिसकर्मी मुस्तैद होकर क्षेत्र में भ्रमण करते हैं और अपराधों पर अंकुश लगाते हैं, लेकिन क्षेत्र में दो बार डबल मर्डर की घटना हो गई और चीता मोबाइल को भी भनक नहीं लग सकी, ऐसे में पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।
अपराध को रोकने के लिए सभी थाने के थानाध्यक्षों को गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं। वे क्षेत्र में गश्त कर अपराधों पर अंकुश लगाने का काम कर रहे हैं। सभी पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि रात्रि में गश्त के दौरान चेकिंग अभियान भी चलाया जाए। आने-जाने वाले लोगों की जांच की जाए जिससे दोबारा ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
- डॉ. राकेश सिंह, आईजी, देवीपाटन मंडल, गोंडा