28 बीएचआर 34 - खैरीघाट सीएचसी में मरीजों का इलाज करते प्राईवेट डाक्टर।
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बहराइच। बेहड़ा गांव में एक ही परिवार के छह लोग मंगलवार को डायरिया से ग्रसित हो गए। आनन-फानन में सभी को सीएचसी ले जाया गया। यहां पर कोई चिकित्सक नहीं मिला। इस पर सभी बीमारों को जिला अस्पताल ले जाने की तैयारी होने लगी। इसी दौरान तीन वर्षीय मासूम ने दम तोड़ दिया। बच्ची की मां को प्राइवेट वाहन से जिला अस्पताल ले जा रहे थे। देर शाम को महिला की भी मौत हो गई। भाई-बहन समेत चार बीमार हैं। वहीं संक्रमितों का सीएचसी में प्राइवेट व्यक्ति द्वारा ड्रिप लगाकर इलाज किया जा रहा था।
शिवपुर विकास खंड अंतर्गत बेहड़ा खैरीघाट में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। यहां पर चिकित्सक समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती है, लेकिन अस्पताल से स्वास्थ्य कर्मी नदारद रहते हैं। कुछ यही हाल मंगलवार को हुआ। गांव निवासी ननकऊ के परिवार के लोग मंगलवार को डायरिया की चपेट में आ गए। परिवार के लोग वाहन का इंतजाम करने लगे। इसी दौरान माया देवी (3) की मौत हो गई। परिवार के लोग बिलखने लगे। ग्रामीणों की मदद से गंभीर हालत में ननकऊ, उनकी पत्नी, पुत्री मोहिनी (10), ममता (6) और पुत्र सोनू (8) की हालत गंभीर होने पर खैरीघाट सीएचसी ले जाया गया। यहां चिकित्सक नहीं मिला। ननकऊ की पत्नी ननकई को प्राइवेट वाहन से जिला अस्पताल ले गए। देर शाम को महिला ने भी दम तोड़ दिया। वहीं चार लोग डायरिया से पीड़ित होकर अस्पताल में भर्ती रहे। ग्रामीणों ने फोन द्वारा मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश मोहन श्रीवास्तव को जानकारी दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि सीएचसी में कोई स्वास्थ्य कर्मी नहीं पहुंचा बल्कि क्षेत्र के एक प्राइवेट कर्मी द्वारा ही डायरिया की चपेट में आए लोगों को ड्रिप चढ़ाई जाने लगी। ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार सुबह ही स्वास्थ्य कर्मी पहुंचे। इलाज से लाभ होने पर सोनू को घर भेज दिया गया जबकि अन्य का इलाज चल रहा है।
बेहड़ा गांव निवासी मां-बेटी की मौत हुई है। इसकी जानकारी मिली है। अस्पताल में प्राइवेट कर्मचारी द्वारा इलाज करना गलत है। इसकी जांच कराई जा रही है। सभी स्वास्थ्य कर्मियों को केंद्र पर रहने के निर्देश हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. राजेश मोहन श्रीवास्तव, सीएमओ