बहराइच/बौंडी। जिले में तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश से घाघरा नदी का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ 2.64 सेंटीमीटर नीचे है जिससे कछार क्षेत्र में बसे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। कई गांव, पानी से घिर गए हैं। वहीं, तेज बारिश के चलते जगह-जगह जलभराव हो गया है। जलभराव होने से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। कई जगह पर पेड़ भी गिर गए। बिजली कटौती भी निरंतर जारी है। ऐसे में तराईवासियों की मुसीबत बढ़ गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, अभी दो दिन और बारिश होने की आशंका है।
तराई के बहराइच जिले में लगातार बारिश हो रही है। मूसलाधार बारिश होने से नदियों का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। महसी में स्थित घाघरा नदी का वर्तमान जलस्तर 109.510 सेंटीमीटर पहुंच गया है। जबकि खतरे का निशान 112.150 सेंटीमीटर है। खतरे के निशान से नदी 2.64 सेंटीमीटर नीचे है। महसी क्षेत्र में नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का मुख्य कारण सोमवार को शारदा व गिरिजापुरी बैराज से पानी छोड़ा जाना है। निरंतर बारिश से जिलेवासियों का जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। जगह-जगह जलभराव हो गया है। जलभराव होने से लोगों को आवागमन करने में भी परेशानी हो रही है। खेतों में पानी भर गया है। जिससे धान व मेंथा ऑयल की फसल बर्बाद हो रही है। बारिश के बीच ही बिजली कटौती भी जा रही है। प्रत्येक आधे व एक घंटे में बिजली काटी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। कई गांवों में बीते दो से तीन दिनों से बिजली नहीं आ रही है। वहीं मंगलवार को भारी बरसात के बीच शहर के गांधी स्कूल के निकट लगे पीपल के पेड़ की भारी भरकम डाल टूट गई। जिससे मार्ग पर आवागमन प्रभावित हो गया। मौसम वैज्ञानिक एमपी सिंह का कहना है कि अभी दो दिन और बारिश के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में किसान फसलों की देखभाल करते हैं। जलनिकासी की भी व्यवस्था बनाकर रखें। उपजिलाधिकारी एसएन त्रिपाठी ने बताया कि जलस्तर पर निरंतर नजर रखी जा रही है। साथ ही तहसीलदार राजेश कुमार वर्मा राजस्व कर्मियों के साथ क्षेत्र में भ्रमण कर नजर रख रहे हैं।
महसी में नदी का जलस्तर बढ़ने से जोगापुरवा, मांझा दरिया बुर्द, गोलागंज, कायमपुर, सिलौटा, छत्तरपुरवा, सेमरही, पचदेवरी, मंगलपुरवा, तूलापुरवा, हेमनापुर, मरवट, भौंरी, सिपहिया हुलास गांवों में बारिश का पानी भरा हुआ है। साथ ही निरंतर जलस्तर भी बढ़ रहा है। इसको लेकर ग्रामीणों में भय है।