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Bahraich: चचेरे भाई की हत्या में युवक को फांसी की सजा, कोर्ट बोला-तब तक लटकाया जाए...जब तक उसकी मौत न हो जाए

Fri, 09 Jan 2026 08:41 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच

सार

बहराइच के नानपारा क्षेत्र में चचेरे भाई की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। तंत्र-मंत्र और बलि के नाम पर दस वर्षीय बच्चे की हत्या करने वाले अभियुक्त को फांसी की सजा और एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है।
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कोर्ट ने सुनाई सजा - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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बहराइच में कोतवाली नानपारा के परसा अगैया, निवासी एक अभियुक्त को चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने शुक्रवार को चचेरे भाई की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि अभियुक्त की गर्दन में फांसी का फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। उस पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं दो अन्य अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया गया।

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अभियोजन के अनुसार ग्राम परसा अगैया निवासी किशुन ने 23 मार्च 2023 को थाने में तहरीर देकर बताया था कि वह रिश्तेदारी में परिवार के साथ एक कार्यक्रम में गया हुआ था। उसी शाम उनके भतीजे अनूप वर्मा ने मोबाइल फोन पर सूचना दी कि उनके दस वर्षीय पुत्र विवेक वर्मा का शव एक खेत में पड़ा हुआ है।

विवेक के गले पर धारदार हथियार से वार के निशान थे, जिससे लग रहा था कि उसकी हत्या किसी धारदार हथियार से की गई है। पिता की तहरीर पर पुलिस ने उसी दिन हत्या समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी।

फावड़े से की थी हत्या 

विवेचना के दौरान 25 मार्च 2023 को सामने आया कि विवेक की हत्या उसके चचेरे भाई अनूप वर्मा ने जंगली और चिंताराम की मदद से की थी। पुलिस ने अनूप को हिरासत में लेकर उससे कड़ाई से पूछताछ की, जिसमें उसने फावड़े से विवेक की हत्या करने की बात स्वीकार की। पूछताछ में अभियुक्त ने तंत्र-मंत्र और बलि के नाम पर हत्या करने की बात भी कबूल की।

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विवेचना अधिकारी ने अभियुक्त अनूप की निशानदेही पर गांव के एक बाग से हत्या में प्रयुक्त फावड़ा बरामद किया तथा अन्य साक्ष्य एकत्र कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले में एडीजीसी (क्रिमिनल) ने 27 अप्रैल 2023 से न्यायालय में साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत करने शुरू किए।

शुक्रवार को चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील प्रसाद की अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने अभियुक्त द्वारा कारित अपराध को अत्यंत गंभीर बताते हुए कठोरतम सजा दिए जाने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मुकदमे में नामजद जंगली और चिंताराम को दोषमुक्त कर दिया, जबकि मुख्य अभियुक्त अनूप वर्मा को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोषसिद्ध अभियुक्त अनूप वर्मा की गर्दन में फांसी का फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। इसके साथ ही उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
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