बहराइच। खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमत से आम लोगों को निजात नहीं मिल पा रही। गृहणियों के रसोई का बजट गड़बड़ा रहा है। बीते एक सप्ताह में ही खाद्य पदार्थो की कीमतों में दो से 15 रूपए तक की बढ़ोत्तरी हो गई है। खाद्य पदार्थो के दामों में निरंतर हो रही बढ़ोत्तरी से अब आम लोगों को दो वक्त के लिए दाल-रोटी का इंतजाम करने में जेब ढीली करनी पड़ रही है। सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने में पूरी तरह फेल होती जा रही है। देश में बढ़ रही महंगाई का दौर खत्म होने के नाम नहीं ले रहा है। सरकार ने अपना खजाना भरने के लिए खाद्य पदार्थो पर भी पांच प्रतिशत जीएसटी लगा दिया था जिससे खाद्य पदार्थ के दाम बढ़ गए थे। लेकिन उसके बाद भी महंगाई का दौर थम नहीं। महंगाई का सबसे ज्यादा असर अरहर की दाल पर पड़ा है। हालात यह है कि अरहर की दाल की कीमतों में प्रतिकिलो 15 रूपए की बढ़ोत्तरी हो गई है जबकि उरद की दाल में पांच रूपए की वृद्धि कर दी गई है।
इसके साथ आटा, चीनी, मैदा, चावल, सरसों के तेल में भी दो से लेकर पांच रूपए का उछाल देखने को मिल रहा है। सरकार की ओर से अप्रैल माह में रसोई गैस के दामों में बढ़ोत्तरी कर गृहणियों के रसोई का बजट बिगाड़ दिया था। अब खाद्य पदार्थो में आई अचानक उछाल ने सभी को परेशान कर दिया है। महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम व गरीब वर्ग के लोगों पर देखने को मिल रहा है।
इस वर्ग के लोगों के सामने अब दाल परोसना किसी चुनौती से कम नहीं। हालांकि महंगाई के असर से रिफाइंड अभी अछूता रहा है। रिफाइंड के दाम में 10 रूपए की कमी देखने को मिली है।
महंगाई ने बिगाड़ रखा है बजट
देश पहले से ही महंगाई की आग में झुलस रहा है। खाद्य पदार्थो की कीमतों के साथ गैस आदि की दाम पहले से ही आसमान छू रहे हैं। रसोई का बजट गड़बड़ाया है। महंगाई के हिसाब से आमदनी नहीं बढ़ रही है। अब एक बार फिर खाद्य पदार्थो की कीमतों में इजाफे ने सभी को परेशानी में डाल दिया है। -लक्ष्मी शुक्ला गृहणी
सरकार को कीमतों पर रखना चाहिए काबू
अब ऐसा प्रतीत होने लगा है कि सरकार का कीमतों पर कोई नियंत्रण ही नहीं रहा है। रोजमर्रा की इस्तेमाल होने वाले चीजों में मनचाही बढ़ोत्तरी की जा रही है। महंगाई से गरीब तो परेशान चल ही रहा था। अब इसका असर मध्यम वर्ग पर भी दिखाई देने लगा है। सरकार को कम से कम रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थो व अन्य सामानों की कीमतों पर नियंत्रण रखना चाहिए। - अर्चना मायर, गृहणी