जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी की जांच रिपोर्ट में खुलासा
निर्माण संस्था मांग रही करीब पांच करोड़ का अतिरिक्त बजट
स्वीकृति लागत का पूरा भुगतान होने के बाद भी निर्माण लंबित
बहराइच। जिम्मेदार अधिकारियों में लापरवाही किस कदर हावी है इसका ताजा उदाहरण है नानपारा तहसील के बलहा विकासखंड में बनाया जा रहा महाविद्यालय। जिम्मेदारों ने चार करोड़ 95 लाख की धनराशि के हेरफेर को अंजाम देने के लिए बीते तीन सालों से महाविद्यालय निर्माण अटका रखा है। परिणामस्वरूप क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राओं को परेशानी उठानी पड़ रही है।
नानपारा तहसील के बलहा विकासखंड के हजारों बच्चों को दौड़ भाग से मुक्ति देते हुए शासन की ओर से वर्ष 2012-13 में लखैयाकला में महाविद्यालय निर्माण की स्वीकृति की गई थी। शासन की ओर से महाविद्यालय के कला, विज्ञान व वाणिज्य संकाय के भवन निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई।
निर्माण के लिए शासन की ओर से कुल 769.60 रुपये स्वीकृत किए गए और 2012-13 में ही निर्माण के लिए 160 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी। संस्था ने भी तेजी दिखाते हुए जून 2014 में महाविद्यालय के विभिन्न संकायों के भवन निर्माण का कार्य शुरू कर दिया। लेकिन इसी दौरान साल 2014 में ही शासन की ओर से राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रुसा) लागू किया गया। इसके तहत महाविद्यालयों के निर्माण के लिए नए स्तर पर नक्शे बनाए गए और उनके लिए 1170.55 लाख रुपये देने की बात कही गई।
ये जानकारी होने पर जिले के लखैया कला में निर्माण कार्य शुरु कर चुकी राजकीय निर्माण निगम संस्था के जिम्मेदारों ने भी इस योजना के नाम पर हेरफेर करने की ठान ली। जिम्मेदारों ने नियम विरुद्ध जाकर महाविद्यालय निर्माण की लागत को 769.60 लाख से बढ़ा कर 1170.55 लाख दर्ज कर दिया। वहीं इस बजट की चाहत में हजारों बच्चों के भविष्य को दरकिनार कर महाविद्यालय निर्माण को लंबित कर दिया। हालत ये है कि निर्माण शुरू होने के नौ साल बाद भी निर्माण कार्य लंबित हैं। वहीं क्षेत्र के बच्चे शिक्षण कार्य के लिए नानपारा व रुपईडीहा में स्थित महाविद्यालयों की दौड़ भाग कर रहे हैं।
इनसेट-
जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी की जांच में हुआ खुलासा
लंबित चल रहे राजकीय महाविद्यालय लखैया कला में की जा रही वित्तीय अनियमितता का खुलासा जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी द्वारा डीएम को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में पूरे प्रकरण में निर्माण संस्था द्वारा 400.95 लाख रुपये के वित्तीय अनियमितता के चक्कर में कार्य को लंबित करने की बात कही गई है। सहायक जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी सुनील सिंह ने बताया कि निर्माण संस्था द्वारा मई 2014 में निर्माण कार्य शुरू कर दिया था। जबकि शासन की ओर से रुसा योजना की शुरुआत दिसंबर 2014 में की गई। तब तक संस्था की ओर से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया था। वहीं शासन की ओर से रुसा योजना के शासनादेश में निर्माण शुरू हो चुके कार्यों को इसका लाभ न मिलने की स्पष्ट बात कही गई थी। बावजूद इसके निर्माण संस्था की ओर से मार्च 2015 में निर्माण कार्य शुरू होने का दावा करते हुए अतिरिक्त बजट की मांग की गई है। जो साफ तौर पर निर्माण संस्था राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड के 400.95 के वित्तीय अनियमितता के इरादे को उजागर करती है। जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है।
संवाद