जिले में एचआईवी/एड्स पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्ष 2016 में जनवरी से नवंबर तक तराई के 143 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए है। इनमें तीन गर्भवती महिलाएं भी है। सभी को एचआईवी के संक्रमण का पता जिला अस्पताल के आईसीटीसी सेंटर में जांच से चला।
जो आंकड़े सामने आए हैं, उसके तहत औसतन हर माह जिले में 13 लोग एचआईवी संक्रमित मिल रहे हैं। तराई में एड्स के बढ़ रहे मामलों से जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी हतप्रभ हैं।
उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी व स्वास्थ्य विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद तराई में एचआईवी पॉजिटिव की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। इसकी बड़ी वजह साक्षरता व एड्स के प्रति जागरूकता की कमी है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. डीके सिंह कहते हैं कि इंटीग्रेटेड काउंसलिंग टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) में प्रतिमाह औसतन 400 लोगों की जांच की जाती है। इनमें से औसतन 13 लोग एचआईवी पॉजिटिव मिल रहे हैं। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 11.5 का था। जनवरी 2016 से नवंबर तक 143 लोग एचआईवी संक्रमित मिले हैं।
आईसीटीसी सेंटर की काउंसलर तरन्नुम व लैब टेक्नीशियन शुएब अहमद का कहना है कि इनमें ज्यादातर लोग ऐसे है जो जिले से बाहर बडे़ शहरों में नौकरी कर रहे हैं। जांच में तीन गर्भवती महिलाओं के भी एचआईवी संक्रमित होने का पता चला है। उन्होंने बताया कि जो एचआइवी संक्रमित मिले हैं, उनमें ड्रग्स यूजर्स, मजदूर व रिक्शा चालकों की संख्या अधिक है।