बहराइच। पुलिस सुरक्षा के बीच हिंसा प्रभावित महराजगंज में रौनक लौटने लगी है। बुधवार को 11वें दिन दोपहर में हालात पूरी तरह सामान्य दिखे। हालांकि लोग अब भी डरे हैं। दुकानें खुल गई हैं। लेकिन खरीदार नहीं आ रहे हैं।
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ग्रामीण ग्राहकों पर ही निर्भर हैं दुकानदार
महराजगंज बाजार में जरूरत की सभी वस्तुएं मिलती हैं। 10 से 15 किलोमीटर दायरे के ग्रामीण यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यहां के दुकानदार ग्रामीणों पर ही निर्भर रहते हैं। लेकिन 13 अक्तूबर की हिंसा के बाद से महराजगंज में सन्नाटा पसर गया था। सिर्फ सुरक्षाबलों के बूटों की धमक ही सुनाई दे रही थी।
दोषियों को मिले कड़ी सजा
महराजगंज निवासी सरोज प्रतिमा विसर्जन के दौरान अपने घर के सामने प्रसाद बांट रहे थे। तभी दंगाइयों ने उन पर हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। उनकी बाइक को आग के हवाले कर दिया। हालत नाजुक होने के कारण उन्हें मेडिकल कॉलेज से लखनऊ रेफर किया गया था। मंगलवार को इलाज कराकर घर पहुंचे सरोज ने बताया कि जिन लोगों ने उन पर हमला किया है और बाइक फूंकी है उन्हें सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि धार्मिक स्थल से भड़काऊ एनाउंसमेंट न किया गया होता तो दंगा नहीं होता। भड़काऊ एनाउंस सुनने के बाद ही दूसरे पक्ष ने पथराव शुरू की थी।
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बुलडोजर का डर समाप्त
महराजगंज कस्बे में 18 अक्तूबर को पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने 23 लोगों के घर पर ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा किया था। इसके बाद कस्बेवासियों ने स्वयं घरों व दुकानों को तोड़ना शुरू कर दिया था। इसी बीच हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर चलाने पर रोक लगा दी। इस पर अतिक्रमणकारियों में बुलडोजर का भय लगभग खत्म हो गया है। बुधवार को कोई भी व्यक्ति अतिक्रमण हटाते नहीं दिखा।