पानी का टाइगर कहलाने वाले मगरमच्छ को मंगलवार सुबह जमीन पर भी अपना रुतबा कायम करने की सनक सवार हुई और उसकी इस कोशिश का खामियाजा सैकड़ों रेल यात्रियों ने भोगा। हुआ यूं कि ओरई नाले से निकल एक मगरमच्छ रेल ट्रैक पर पहुंच गया।
इसी बीच मैलानी से आ रही पैसेंजर के चालक ने मगरमच्छ को देख ट्रेन रोक दी। सूचना के बावजूद वनकर्मी नहीं पहुंचे तो यात्रियों ने पत्थर मारकर मगरमच्छ को रेल ट्रैक से हटाया। लगभग एक घंटे तक ट्रेन मौके पर खड़ी रही। काफी देर बाद पहुंचे कतर्नियाघाट के वनकर्मियों ने पानी के राजा को पिंजरे में कैद किया।
मालूम हो कि कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के बीच से होकर मैलानी-गोंडा प्रखंड की रेल लाइन गुजरती है। मझरा से ककरहा तक 60 किलोमीटर की दूरी में घना जंगल है। वन्यजीवों की सुरक्षा के चलते जंगल में ट्रेन की रफ्तार काफी धीमी रहती है।
मंगलवार सुबह 10 बजे के आसपास मैलानी से चलकर गोंडा जाने वाली 5258 पैसेंजर जब निशानगाड़ा रेंज के किलोमीटर संख्या 178 के पास पहुंची तो ट्रेन चालक एके सिंह को ट्रैक पर एक बड़ा जीव दिखाई दिया। उन्होंने ट्रेन को कुछ दूर पहले ही रोक लिया। चालक उतरकर आगे बढ़े तो विशालकाय मगरमच्छ दिखा।
वह रेल ट्रैक के बीचोंबीच पड़ा था। कुछ यात्री भी मौके पर पहुंच गए। जब 20 मिनट तक मगरमच्छ ट्रैक से नहीं हटा तब चालक ने वाकीटॉकी से निशानगाड़ा और बिछिया रेलवे स्टेशन पर सूचना दी। रेलकर्मियों ने तत्काल रेंज कार्यालय निशानगाड़ा को अवगत कराया लेकिन एक घंटा बीतने तक वनकर्मी नहीं पहुंचे। इसी दौरान यात्रियों ने मगरमच्छ पर पत्थर फेंकना शुरू किया तो मगरमच्छ रेल ट्रैक से उतरकर झाड़ियों में छिप गया। तब 11:15 बजे ट्रेन रवाना हो सकी।