गांव के किसानों व लघु उद्यमियों को गांव में ही उपज का विपणन व ग्रामीणों को मार्केट मुहैया कराने के लिए शासन ने एग्रीकल्चरल हब निर्माण को हरी झंडी दी थी।
इसके तहत नानपारा तहसील क्षेत्र में 10 हब का निर्माण होना था। उनमें से पांच स्थानों पर हब निर्माण की कवायद शुरू कर दी गई है। एक हब के निर्माण पर 19.58 लाख रुपये खर्च होंगे। यह सभी हब 10-10 किमी की दूरी पर ग्रामीण क्षेत्रों में बनेंगे।
गांव के किसानों को खेतों की उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। खेती किसानी के लिए खाद, बीज, दवा की खरीददारी में भी दिक्कतें होती हैं।
इसके अलावा घरेलू वस्तुओं की खरीददारी के लिए भी बाजार के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इन सब समस्याओं को देखते हुए शासन ने प्रत्येक मंडी क्षेत्र में 10-10 किलोमीटर के अंतराल पर एग्रीकल्चरल हब निर्माण को हरी झंडी दी थी। उसी के तहत नानपारा क्षेत्र में स्थित मंडी समिति के सचिव गजेंद्रनाथ मिश्र ने उपजिलाधिकारी से वार्ता के बाद मिहींपुरवा और नानपारा क्षेत्र में पांच-पांच स्थानों पर हब निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें मिहींपुरवा क्षेत्र में बड़खड़िया, गंगापुर, हरखापुर और कठौतिया तथा मिहींपुरवा शामिल हैं।
इसके अलावा नानपारा क्षेत्र में शिवपुर, हाड़ा बसेहरी, रामपुर धोबियाहार, बैबाही और बढ़ैया कला इलाकों में हब निर्माण का प्रस्ताव बनाया गया था। यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया।
शासन ने इसे हरी झंडी दे दी है। उसी के तहत मिहींपुरवा, बड़खड़िया और गंगापुर क्षेत्रों में हब निर्माण की कवायद शुरू हुई है। मिहींपुरवा का एग्रीकल्चरल हब बनकर तैयार भी हो चुका है। इसका संचालन डेढ़ से दो माह में शुरू होने की उम्मीद है।
जिसके चलते एक ही प्लेटफार्म पर किसानों और ग्रामीणों को घरेलू उपयोग की सामग्री से लेकर खेती, किसानी का सामान तक मुहैया हो सकेगा।
एक दुकान की लागत लगभग दो लाख रुपये के आसपास आएगी। मंडी सचिव नानपारा गजेंद्रनाथ कृष्ण ने बताया कि हरखापुर, कठौतिया, बैबाही, बढ़ैयाकला और रामपुर धोबियाहार में हब निर्माण के लिए जमीन नहीं मिल पाई है। इस मामले में शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।
जमीन चिन्हींकरण के प्रयास किये जा रहे हैं। एक एग्रीकल्चरल हब में एक कवर्ड प्लेटफार्म, दो इंडिया मार्का हैंडपंप, लगभग 25 से 30 दुकानें स्थापित होंगी। दुकान का आवंटन बोली के आधार पर किया जाएगा।