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आठ बच्चों की मौत के बाद फातिमा की गोद हुई आबाद

Tue, 12 Jan 2016 10:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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बहराइच। प्रसव के चंद घंटों बाद नवजात की मौत से फातिमा मानसिक रूप से टूट चुकी थीं। फातिमा के साथ ऐसा एक नहीं आठ बार हुआ। सप्ताह भर पूर्व फातिमा ने अपनी नवीं संतान को जन्म दिया।
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लेकिन प्रसव के कुछ ही पलों में नवजात का शरीर पीला पड़ने लगा। यह देख फातिमा का मन फिर दहशत में आ गया। लगा कि कहीं कलेजे का टुकड़ा फिर दूर न हो जाए।

हालांकि, किसी की सलाह पर फातिमा ने नवजात को शहर के एक नर्सिंग होम में भर्ती करवाया। यहां फोटो थेरेपी व ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद नवजात स्वस्थ है।

दरअसल, फातिमा के खून में आरएच इनकंपैटेबिलिटी दोष है। इस कारण उनकी संतानें कुछ दिनों में भी दम तोड़ देतीं थीं।

श्रावस्ती जिले के भिनगा कोतवाली अंतर्गत जानकीनगर निवासी यार मोहम्मद का निकाह करीब 15 साल पहले फातिमा के साथ हुआ था। निकाह के एक साल बाद फातिमा की गोद भरी लेकिन प्रसव के कुछ घंटो बाद नवजात ने दम तोड़ दिया। उसने प्रकृति की इच्छा मानकर दुख सहन कर लिया।

ये दुख फातिमा व उसके पति यार मोहम्मद को आठ बार झेलना पड़ा। फातिमा ने मां बनने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। नौ माह पूर्व फातिमा की एक बार फिर गोद भरी और गत छह जनवरी को उसने घर पर बेटे को जन्म दिया।
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जन्म के समय नवजात स्वस्थ था लेकिन समय बीतने के साथ उसकी शारीरिक क्रियाएं शिथिल पड़ने लगीं। शरीर पीला पड़ने लगा। इन लोगों ने नवजात को बहराइच शहर के एक पीडियाट्रिक नर्सिंग होम में दिखाया।

यहां डॉ शिशिर अग्रवाल ने नवजात, मां फातिमा व पिता यार मोहम्मद के रक्त का परीक्षण करवाया तो रिपोर्ट में फातिमा आरएच निगेटिव व नवजात आरएच पॉजिटिव निकला है। पता चला कि आरएच इनकंपैटेबिलिटी के कारण उसकी आठ संतानें नहीं रहीं।

डॉ. शिशिर ने ब्लड ट्रांसफ्यूजन कर नवजात के शरीर का रक्त बदला। उसे दो दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया और इसके बाद अब उसे डबल सरफेस एलईडी ब्लू लाइट फोटोथेरेपी दी जा रही है। नवजात अब पूरी तरह स्वस्थ है।

ये है आरएच इनकंपैटेबिलिटी

डॉ. शिशिर अग्रवाल ने बताया कि आर एच फैक्टर रक्त में पाया जाने वाला विशेष प्रोटीन है। दुनिया के 85 फीसदी लोग आरएच पॉजिटिव है।

जब एक महिला आरएच निगेटिव होती है और उससे जन्मा नवजात या पिता आरएच पॉजिटिव होता है, इस दशा को आरएच इंनकंपैटिबिलिटी कहते हैं। इस कारण नवजात में कई बीमारियां हो जाती हैं और ब्रेन डैमेज, एनीमिया, हार्ट फेल्योर के चलते मौत हो जाती है।

गर्भधारण के पूर्व रखें ख्याल

डॉ. शिशिर ने कहा कि आरएच निगेटिव महिलाओं को गर्भधारण करने पहले चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। समय-समय पर खून की जांच करानी चाहिए और प्रसव के तुरंत बाद नवजात का इलाज कराना चाहिए।
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