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खाता मिल ने खुलवाया, कर्ज वसूली का नोटिस गरीबों को

Wed, 01 Jul 2015 10:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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अब इन लोगों को बैंक ने लोन वसूली का नोटिस भेजा तो ग्रामीणों के पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि उन्होंने तो केसीसी बनवाया ही नहीं। ये कर्ज भी मामूली नहीं। बैंक ने कुल 30 करोड़ रुपये का कर्ज बांटा है। ये खेल अकेले बैंक का नहीं, इसमें लंबा हाथ चिलवरिया चीनी मिल का भी है, जिसने इन लोगों को गन्ना किसान दिखाकर इनके नाम से खाता खुलवाया।
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सारा धन खुद रखने के बाद अब उसका सारा जिम्मा गरीबों के सिर मढ़ दिया है। परेशान ग्रामीण बैंक और प्रशासनिक अधिकारी के चक्कर काट रहे हैं। सदर तहसील और कैसरगंज तहसील के 18 गांवों के 1245 ग्रामीणों को बीते 10 दिनों में बैंक ऑफ इंडिया बहराइच शाखा से भेजा गया नोटिस मिला है। इस नोटिस में किसी पर 1.80 लाख तो किसी पर सवा दो लाख और किसी पर साढ़े तीन लाख तक का कर्ज दर्शाया गया है।

जिन लोगों को पास न खेत है न मकान, उन्हें भी केसीसी धारक बताकर नोटिस जारी किया गया है। इतना ही नहीं, अवयस्क और निशक्तों के घर पर भी नोटिस पहुंचा है। सबसे अधिक लोग पयागपुर, नूरपुर, पंचपुरवा, बंशपुरवा, हरिहरपुर रैकवारी, धरसंवा और हुजूरपुर क्षेत्र के हैं। बैंक द्वारा कर्जदार बनाए जाने से परेशान ग्रामीण बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन उनकी कोई सुन नहीं रहा है।
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हम किसान ही नहीं, गन्ना नहीं बेचा, फिर चीनीमिल हमें क्या जाने
पयागपुर निवासी पीयूष को भी लगभग दो लाख का कर्जदार बताया गया है। पीयूष इसी वर्ष 18 वर्ष का हुआ है, जबकि उसके नाम किसान क्रेडिट कार्ड वर्ष 2013 में बना है। उस समय पीयूष नाबालिग था। ऐसे में पीयूष के पास न कोई संपत्ति है न ही कोई काम धंधा। फिर भी उसके नाम क्रेडिट कार्ड कैसे जारी हुआ, इस पर सवाल उठ रहे हैं। यही पीड़ा पयागपुर निवासी मनीष की है। मनीष के साथ प्रफुल्ल और विवेक भी भूमिहीन हैं। फिर भी उन्हें कर्जदार बना दिया गया है। बिना किसी लिखापढ़ी और कागजात के किसान क्रेडिट कार्डधारक दर्शाया गया है। मनीष का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद रात की नींद हराम हो गई है।

ऋण के लिए मिल जिम्मेदार, न घबराएं ग्रामीण
बैंक आफ इंडिया के शाखा प्रबंधक एएन गौतम का कहना है कि बैंक ऑफ इंडिया का चिलवरिया सिंभावली सुगरमिल से टाई-अप है, जिसके तहत किसानों को खाद, बीज ऋण पर देने के लिए उनके सट्टे के द्वारा चीनी मिल किसानों का खाता खुलवाता है। उसी के तहत लिमिट बनाकर ऋण प्रदान किया जाता है। ऐसे में ऋण के लिए चीनी मिल जिम्मेदार है। फिर किसानों को नोटिस कैसे पहुंचा, यह उनकी समझ में नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि ऋण दो साल पुराना है। डिस्पैच रजिस्टर पर नोटिस भेजने का ब्यौरा भी दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ किसान उनसे भी मिले हैं। वह पूरे मामले की जांच करवा रहे हैं। जो भी दोषी होगा, कार्रवाई की जाएगी।

सिटी मजिस्ट्रेट ने एसडीएम को सौंपी जांच
हरिहरपुर रैकवारी के ग्रामीण बुधवार को गांव निवासी रमाशंकर पांडेय की अगुवाई में सिटी मजिस्ट्रेट बीएन पांडेय से मिले। इन ग्रामीणों ने बिना किसी लिखापढ़ी के बैंक द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड बनाने और कर्जा देने की व्यथा सुनाई है। किसानों ने सिटी मजिस्ट्रेट को बैंक की नोटिस भी दिखाया है। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम कैसरगंज को जांच सौंपी है।

बिना खेत के कैसे बना क्रेडिट कार्ड, कराएंगे जांच
लीड बैंक प्रबंधक एसके झा भी बैंक ऑफ इंडिया में हुए इस खेल से हतप्रभ हैं। उन्होंने कहा कि बिना चल अचल संपत्ति के किसान क्रेडिट कार्ड जारी नहीं हो सकता है। ऐसे में ग्रामीणों को केसीसी कैसे जारी कर दिया गया। वह पूरे मामले की जांच कराएंगे, जो भी दोषी होगा। उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

बिना अभिलेखों के कैसे बनाया केसीसी
जिला गन्ना अधिकारी रामकिशुन का कहना है कि बिना अभिलेखों के बैंक ने केसीसी कैसे बनाया, इसकी जांच कराई जाएगी। इतने बड़े पैमाने पर ऋण वितरण करना बैंक की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। ग्रामीण अगर शिकायत करेंगे तो विभागीय जांच भी कराऊंगा।

तो इस तरह हुआ खेल
चिलवरिया चीनीमिल को क्षेत्र के जो किसान गन्ना सप्लाई करते हैं। उन्हें चीनी मिल की ओर से हर साल बीज और खाद सब्सिडी पर मुहैया कराया जाता है। इसके लिए कुछ किसान ऋण भी लेते हैं, जिसके चलते चीनी मिल बैंक ऑफ इंडिया में किसानों के नाम से खाता खोलता है। उसी पर बैंक ऋण देता है, जिसके तहत किसानों को खाद और बीज का वितरण होता है। इसकी अदायगी चीनी मिल को करनी होती है। जबकि ऋण लेने वाले किसानों से गन्ना सप्लाई के दौरान कर्ज की राशि वसूली जाती है।
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