बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र पर्यटकों के लिए 15 नवंबर से खोल दिया जाएगा। इसके लिए वन विभाग ने पूरी तैयारियां कर ली हैं। पर्यटक भी वन क्षेत्र की सुरम्यता का लुत्फ उठाने के लिए उत्साहित हैं। ठंड की आहट ने कतर्निया के सौंदर्य में चार चांद भी लगा रखा है। हालांकि, सूखी पड़ी गेरुआ नदी से पर्यटकों को निराशा जरूर होगी।
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में बाघ, तेंदुए, हिरन, हाथी, चीतल, बारहसिंघा व अन्य दुर्लभ वन्यजीव विहार करते हैं। लेकिन, बरसात के मौसम में जंगल की पगडंडियां क्षतिग्रस्त होने और वन्यजीवों के हमले की आशंका बढ़ने के मद्देनजर पर्यटकों के आगमन पर रोक लगा दी जाती है। 15 जुलाई से 14 नवंबर तक वन्यजीव विहार में पर्यटकों का प्रवेश वर्जित रहता है। अब फिर से पर्यटकों के स्वागत के लिए कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस बार कतर्नियाघाट पहुंचने वाले पर्यटक मोतीपुर और ककरहा रेंज में इको टूरिज्म के रूप में विकसित विश्राम भवन के अलावा वातानुकूलित थारूहट, 16 बेड के डबल स्टोरी डॉरमेट्री, कैंटीन, का भी लाभ ले सकेंगे। प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि इको टूरिज्म के लिए नए सिरे से निर्मित भवनों के अलावा ककरहा, मोतीपुर, निशानगाड़ा, धर्मापुर, मुर्तिहा और कतर्नियाघाट गेस्ट हाउस में भी पर्यटक ठहर सकेंगे। कतर्नियाघाट के दो थारूहट पर्यटकों के लिए बुक किए जाएंगे।
डीएफओ ने कहा कि कतर्नियाघाट आने वाले पर्यटक अपने साथ रेडियो, रिवॉल्वर, बंदूक आदि नहीं ला सकेंगे। जंगल में तेज आवाज करना प्रतिबंधित है।