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पूर्व जिलाध्यक्ष के मोबाइल से किसी और ने की कॉल!

Sun, 29 Dec 2013 05:44 AM IST
Bahraich
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बहराइच। नेहरू युवा केंद्र की जिला समन्वयक से रंगदारी मांगने के मामले में गिरफ्तार किए गए कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष को देर रात कोतवाली देहात पुलिस ने छोड़ दिया। कोतवाल का कहना है कि पूर्व जिलाध्यक्ष के मुताबिक उनका सिम गायब हो गया था, ऐसे में किसी दूसरे ने उनके मोबाइल का इस्तेमाल किया है। सिम गायब होने की सूचना पूर्व जिलाध्यक्ष ने गिलौला थाने में दी थी। वहीं, एसपी का कहना है कि मामले की जांच चल रही है, फाइल बंद नहीं हुई है।
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नेहरू युवा केंद्र की जिला समन्वयक साधना श्रीवास्तव से फोन पर 50 हजार रुपये मांगने के आरोप में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष श्रावस्ती योगेंद्रमणि त्रिपाठी को शुक्रवार शाम दोनक्का तिराहे के पास दबिश देकर दबोच लिया था। जिस मोबाइल नंबर से धमकी मिली था वह नंबर सर्विलांस और क्राइम ब्रांच की टीम ने ट्रेस किया था तो वह योगेंद्रमणि त्रिपाठी का निकला था। इसी आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई थी। एसपी मोहित गुप्ता ने भी पूछताछ के बाद जेेल भेजने की बात कही थी लेकिन देर रात पूर्व जिलाध्यक्ष को कोतवाली देहात सेे छोड़ दिया गया।
प्रभारी निरीक्षक रामजी चौधरी का कहना है कि देर रात तक पूर्व जिलाध्यक्ष से पूछताछ की गई तो पता चला कि उनके पास सिम नंबर 8423191600 था। यह सिम माह भर पूर्व गायब हो गया था, उसके बाद पूर्व जिलाध्यक्ष ने फिर उसी नंबर से सिम निकलवाया लेकिन 10 दिन पूर्व मोबाइल समेत वह सिम गायब हो गया। इसकी सूचना गिलौला थाने में दी गई है। प्रभारी निरीक्षक ने कहा कि पूर्व जिलाध्यक्ष जिस सिम का इस्तेमाल कर रहे थे, वह सिम शेखदहीर निवासी रामसेवक के नाम से जारी है। उन्होेंने कहा कि कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लग सका है। इस कारण फिलहाल पूर्व जिलाध्यक्ष को छोड़ा गया है।
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तीन पन्ने की निकलवाई गई कॉल डिटेल
प्रभारी निरीक्षक रामजी चौधरी ने बताया कि पूर्व जिलाध्यक्ष के सिम की कॉल डिटेल निकलवाई गई हैै। तीन पन्नों की कॉल डिटेल है, उसका अध्ययन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
पूर्व जिलाध्यक्ष ने ही दी थी धमकी : साधना
जिले की पुलिस साधना श्रीवास्तव से रंगदारी मांगने के मामले को लेकर जिस तरह से उलझी है, उससे तरह-तरह के सवाल लोगों के जहन में कौंध रहे हैं। इस मामले में जब जिला समन्वयक साधना श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पूर्व जिलाध्यक्ष के कहने पर उन्होंने श्रावस्ती में एक महिला कार्यकर्ता को ब्लॉक वॉलेंटियर पद पर भर्ती कर लिया था लेकिन वह काम पर नहीं आती थीं। इसकी शिकायत की गई थी तो पूर्व जिलाध्यक्ष ने किसी तरह नौकरी चलाने की बात कही थी। जिला समन्वयक ने कहा कि उन्हाेंने इस मामले में श्रावस्ती के सांसद से भी शिकायत की थी, उसी के बाद पूर्व जिलाध्यक्ष खुन्नश रख रहे थे।
नहीं दी सिम गायब होने की सूचना
गिलौला थाने के थानाध्यक्ष दिनेश कुमार यादव का कहना है कि उनके यहां पूर्व जिलाध्यक्ष ने सिम गायब होने की कोई सूचना नहीं दी है। थानाध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने जीडी और गुमशुदगी रजिस्टरों को खंगाला है लेकिन कोई भी ब्यौरा दर्ज नहीं है।
दूसरे के नाम से कैसे जारी हो गया सिम
सिमकार्ड जारी करवाने के लिए आईडी की जरूरत होती है। एक माह पूर्व जिलाध्यक्ष के मोबाइल का सिम गायब हुआ तो उन्होेंने पुन: उसी सिम को निकलवा लिया, ऐसे में उन्हें रामसेवक नाम की आईडी कहां मिली। दूसरा सवाल यह उठ रहा है कि सर्विलांस पर जब मोबाइल नंबर लगाया गया तो उसमें पूर्व जिलाध्यक्ष का लोकेशन कैसे मिल रहा है? जबकि कोतवाली देहात पुलिस का कहना है कि सिम गायब हो चुका है। पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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