बहराइच। मल्टी सेक्टोरियल डेवलपमेंट परियोजना (एमएसडीपी) के तहत मिले पौने दो करोड़ रुपये में से नाममात्र काम कराने के बाद जांच के घेरे में आई लैकफेड फरार हो गई। संस्था को जिले में 109 आंगनबाड़ी केंद्रों और 26 स्कूलों में अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराना था। डीएम ने शासन को दोबारा धन देने के साथ ही दूसरी संस्था नामित करने के लिए पत्र लिखा है।
अल्पसंख्यक बाहुल्य जनपद होने के कारण केंद्र सरकार ने बहराइच को एमएसडीपी के तहत चयनित किया है। 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 2011-12 में 300 आंगनबाड़ी केंद्रों और 26 स्कूलों में अतिरिक्त कक्षा कक्षों के निर्माण को हरी झंडी दी थी। इनके निर्माण के लिए सरकार ने लैकफेड को कार्यदायी संस्था नामित किया था। लैकफेड को आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 322.64 लाख रुपये और अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए 117 लाख रुपये मिलने थे, जिसमें से केंद्र सरकार ने पहली किस्त के रूप में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 161.32 लाख रुपये और अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए 58.5 लाख रुपये भेजे।
2012 में सपा सरकार बनने के बाद लैकफेड विभिन्न घोटालों की जांच में फंस गई, जिससे जिले में काम ठप हो गया। इससे पहले संस्था सिर्फ 10 आंगनबाड़ी केंद्र और तीन अतिरिक्त कक्षों का ही निर्माण कर सकी थी। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बालेंदु कुमार द्विवेदी ने बताया कि लैकफेड ने काम बंद कर दिया है। कई बार पत्र लिखने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
तीन माह से अफसरों का अता-पता नहीं
लगभग छह माह पहले संस्था ने जिलाधिकारी किंजल सिंह के दबाव में लैकफेड के एक्सईएन व जेई की तैनाती जिले में की थी लेकिन तीन माह पहले दोनों अभियंताओं का तबादला हो गया। इसके बाद संस्था के किसी अफसर ने जिले के अधिकारियों से संपर्क नहीं किया।
जिलाधिकारी किंजल सिंह का कहना है कि संस्था को शासन से निर्माण कार्य के लिए बजट मिला था, जिसे लेकर संस्था के अधिकारी फरार हैं। बजट की वसूली और संस्था को ब्लैक लिस्ट करने की सिफारिश शासन से की है। साथ ही, दूसरी संस्था को जिम्मेदारी सौंपने का भी आग्रह किया गया है।