बहराइच। बाबागंज स्थित लक्ष्मनपुर माइनर में रिसाव व पटरियां कटने से पिछले दो दिन में 80 किसानों के ढाई सौ बीघा खेत जलमग्न हो गए। खेतों में पानी भरने से फसल बर्बाद हो गई। यह तो बानगी भर है। सिंचाई विभाग की अनदेखी के चलते आए दिन मेजर व माइनर नहरों की पटरियां कट रही हैं। इसका कारण माइनर और मेजर नहराें की पटरियों का कमजोर होना है। नहरों की मरम्मत के लिए इस वर्ष 48 करोड़ का बजट विभाग को मिला था। इसके बावजूद साल भर में करीब 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसल नष्ट हो गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे रहे। लापरवाही का आलम यह है कि वर्ष भर में कितनी बार नहरों की पटरियां कटी हैं, यह रिपोर्ट तक कृषि विभाग को नहर विभाग ने मुहैया
नहीं कराई।
जिले भर में सिंचाई विभाग की तरफ से करीब एक हजार किमी मेजर व माइनर नहरों का संजाल बिछाया गया है। नवाबगंज के खेतों की सिंचाई के लिए चौधरी चरण सिंह सरयू पंप नहर द्वारा लक्ष्मणपुर माइनर का संचालन किया जा रहा है तो जरवल क्षेत्र में जरवल मेजर का संचालन होता है। विगत अप्रैल माह में नहरों की साफ-सफाई व मरम्मत के लिए शासन ने 48 करोड़ का बजट सरयू नहर खंड को आवंटित किया था। लेकिन बजट का बंदरबांट हो गया। सरयू नहर खंड तृतीय के चरदा, सहाबा, परसपुर, शंकरपुर, गोरखा, मकनपुर समेत दर्जनों माइनरों की स्थिति बदहाल है। इन नहरों की न तो पटरियां दुरुस्त कराई गई और न ही सफाई करवाई गई है। किसान पिछले 15 दिन तक टेल तक पानी न पहुंचने से परेशान थे। एक अनुमान के मुताबिक 16 हजार हेक्टेयर फसल समय पर सिंचित होने से वंचित रह गई, जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ।