बहराइच। कतर्नियाघाट संरक्षित वन प्रभाग में अब तक डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग संयुक्त रूप से बाघों की गणना प्रत्येक वर्ष करते थे लेकिन इस बार सिर्फ वन विभाग गणना करवाएगा। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी डाटा फीडिंग में ही मदद करेंगे। जनवरी में कैमरे लगाने का कार्य शुरू हो जाएगा।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इस वन प्रभाग में छह रेंज है। इन रेंजों में कतर्नियाघाट, निशानगाड़ा, ककहरा औैर मुर्तिहा क्षेत्र ऐसेे हैं जहां बाघोें की चहलकदमी अधिक रहती है। वर्ष 2011 की गणना के मुताबिक कतर्नियाघाट वन प्रभाग में बाघों की संख्या लगभग 36 के आसपास है। वर्ष 2012 में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग ने संयुक्त रूप से 80 थर्मो सेंसर कैमरे की मदद से तीन चक्रों में बाघों की गतिविधियों को कैद किया था लेकिन इसका परिणाम अब तक वन मंत्रालय घोषित नहीं कर सका है। फिर भी बाघों के कुनबे में कितनी बढ़ोतरी हुई,इसका आंकलन करने के लिए नए सिरे से कैमरा ट्रैपिंग अभियान की शुरुआत कर दी गई है।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि इस बार वन विभाग स्वयं बाघों की गणना थर्मो सेंसर कैमरे के माध्यम से करवाएगा। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी डाटा फीडिंग में मदद करेंगे। जो तकनीकी समस्याएं आएंगी, उनका निस्तारण अधिकारी करेंगे। उन्होंने बताया कि दुधवा नेशनल पार्क में कैमरा ट्रैपिंग का कार्य चल रहा है। जनवरी के प्रथम सप्ताह सेे कतर्नियाघाट में बाघों की गणना के लिए कैमरे लगाए जाएंगे। कतर्नियाघाट और नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क के बीच खाता कारीडोर क्षेत्र में वन्यजीवों की आमद का अध्ययन करनेे के लिए भी ट्रैपिंग कराई जाएगी।