बहराइच। स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू के डंक पर नियंत्रण के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। शहर व देहात क्षेत्र में नित नए मामले सामने आ रहे हैं। अब तक 657 रोगियों की जांच सिर्फ जिला अस्पताल में हुई है, जबकि 252 रोगी डेंगू पॉजिटिव मिले हैं। औसतन हर दूसरे दिन डेंगू पीड़ित रोगी दम तोड़ रहे हैं। इसके अलावा तमाम ऐसे रोगी हैं, जो काल के गाल में समा तो गए, लेकिन अखबार की सुर्खियां न बन सके। फिर भी स्वास्थ्य विभाग ऑल इज वेल का राग अलाप रहा है।
गौरतलब है कि तराई में वर्ष 2006 में डेंगू का पहला केस सामने आया। महामारी बनने के बाद केंद्र सरकार ने आननफानन वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम शरू किया, जिसके तहत वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम पर जिले में लाखों रुपये खर्च किए गए लेकिन नतीजा सिफर रहा। इसके बाद वर्ष 2007 में नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज प्रोग्राम शुरू किया गया। प्रोग्राम शुरू होने के बाद अब तक डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, फायलेरिया व दिमागी बुखार पर निरोधात्मक कार्रवाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। मानसून पूर्व जिले में वेक्टर जनित रोगों पर रोकथाम के लिए मलेरिया विभाग में 30 फॉगिंग मशीनों की खरीददारी की गई, जिसे पीएचसी व सीएचसी पर उपलब्ध कराया गया। वहीं, जिला पंचायत विभाग में भी हाल ही में 30 फॉगिंग मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं लेकिन न तो समय रहते निरोधात्मक कार्रवाई हुई और न ही प्रभावित गांवों की सूची बनाई गई। नतीजा डेंगू ने जिले में महामारी का रूप अख्तियार कर लिया। जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो सितंबर से शुरू हुए डेंगू के तांडव से अब तक 252 लोग बीमार हो चुके हैं, जबकि 10 रोगियों की मौत हो चुकी है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग मौतों पर चुप्पी साधे हुए है। कारण इन रोगियों की मौत अस्पताल से रेफर होने के बाद लखनऊ ले जाते समय रास्ते में हुई है।
...तो इसलिए बढ़ा प्रकोप
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. महेश्वरी पांडेय कहते हैं कि इस बार तराई में मानसून पूर्व खूब बारिश हुई और यह सिलसिला अक्तूबर के प्रथम सप्ताह तक चला। जगह-जगह जलभराव व गंदगी एडीज मच्छरों के पनपने के लिए नर्सरी साबित हुई। इस कारण तराई में इस बार डेंगू ने जमकर कहर बरपाया। उन्होंने कहा कि डेंगू के मच्छरों के लिए 25 से 30 डिग्री तापमान मुफीद साबित होता है लेकिन धीरे-धीरे सुबह व शाम में ठंडक होने लगी है, तापमान 18 से 22 डिग्री रहने लगा है। उम्मीद है कि दीपावली पर्व तक डेंगू का कहर तराई में समाप्त हो जाएगा। इस मामले में सीएमओ डॉ. उमाकांत वर्मा से बात करने का प्रयास किया लेकिन उनका मोबाइल स्विच आॅफ बताता रहा।
अब तो सामान्य बुखार से भी लगता डर
चरदा निवासी जब्बार अली कहते हैं कि डेंगू के बढ़े प्रकोप से अब तो सामान्य बुखार से भी भय लगता है। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में फॉगिंग नहीं कराई है। महसी निवासी शाहिद ने बताया कि गांव बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में है, इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने एंटीलार्वा का छिड़काव नहीं किया। श्रावस्ती निवासी रामगोपाल ने बताया कि गांवों में स्थापित सीएचसी व पीएचसी में जांच की व्यवस्था नहीं है, जिससे समय पर रोग की पुष्टि नहीं हो पाती है। गिलौला निवासी बच्छराज ने बताया कि अस्पताल में रोक के बावजूद दवाएं बाहर से लिखी जा रही हंै। कोई सहूलियत नहीं है।
पिछले वर्ष का टूटा रिकॉर्ड
तराई में डेंगू पीड़ित मरीजों की तादात ने पिछले साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। वर्ष 2012 में मात्र 40 रोगी सामने आए थे लेकिन इस बार यहां आंकड़ा 252 पहुंच गया है, जबकि बुखार से ग्रसित 657 रोगियों की जांच जिला अस्पताल के पैथोलॉजी में हुई है।