बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र को हरा भरा बनाने वाली नेपाल की गेरुआ नदी फिर रेत में तब्दील हो गई है। इस कारण नदी के दुर्लभ जलीय जीवों की जिंदगी को खतरा उत्पन्न हो गया है। घड़ियालों द्वारा नदी के टापू पर बनाए गए घोंसले भी असुरक्षित हैं। ऐसे में घड़ियालों के अंडों को नुकसान पहुंच सकता है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के बीच से होकर नेपाल की गेरुआ नदी बहती है। यह नदी नेपाल के दानव ताल नामक स्थान पर पहाड़ से निकलती है। चीसा पानी से कैलाली होते हुए नदी भारतीय सीमा क्षेत्र में इंडो-नेपाल सीमा पर कोठियाघाट के निकट भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करती है। कोठियाघाट से चौधरी चरण सिंह गिरिजा बैराज तक नदी की दूरी लगभग 16 किलोमीटर है। इसी के मध्य कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र का घना जंगल है। 20 मई से चौधरी चरण सिंह गिरिजा बैराज पर क्लोजर शुरू कर दिया गया है, जिसके चलते नदी का पानी सूख गया है। कलरव करने वाली नेपाल की गेरुआ नदी रेत मानिंद नजर आ रही है। लोग पैदल नदी पार कर रहे हैं। नदी के सूखने से जलीय जीव गैंगेटिक डाल्फिन, मगरमच्छ, घड़ियाल की जिंदगी भी खतरे में नजर आ रही है। इतना ही नहीं, गर्मी की छुट्टियों में कतर्नियाघाट की सैर पर आने वाले पर्यटकों को भी बोटिंग का मजा नहीं मिल पा रहा है। सबसे बड़ीर दिक्कत गेरुआ नदी के टापू पर घड़ियालों द्वारा घोंसलों में सहेजे गए अंडों को बचाने की है।