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तस्करों से बरामद सिक्के 400 साल पुराने

Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
Bahraich
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बहराइच। जिले की पुलिस द्वारा बरामद किए गए अति प्राचीन सिक्के 400 साल पुराने हैं। जबकि सिक्कों के साथ मिली प्रेस को भी 300 साल पुरानी बताई जा रही है। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षक ने इसका खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि सिक्कों के कॉपर के होने की संभावना है। ऐसे में सिक्कों की वास्तविक कीमत अधिक नहीं है। लेकिन प्राचीनता के हिसाब से सिक्के और प्रेस दोनो बहुमूल्य हैं। देर शाम पुलिस ने जब इसकी तौल कराई तो सिक्कों का वजन 4.5 किलो और प्रेस का वजन एक किलो 800 ग्राम निकला।
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कोतवाली देहात पुलिस द्वारा बरामद किए गए सिक्के और अद्भुत प्रेस की काल गणना को लेकर जिले के लोग संशय की स्थिति में हैं। पुलिस और प्रशासनिक अमले के अधिकारी भी बरामद बहुमूल्य सिक्के और प्रेस की सही जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। इस पर ‘अमर उजाला’ ने लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर व आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के सदस्य डीपी तिवारी से संपर्क साधा। प्रो. तिवारी ने बताया कि सिक्कों पर अरबी और फारसी भाषा में अवध के नवाबों के नाम अंकित हैं। ऐसे में लग रहा है कि ये सिक्के अवध के नवाबों के समय प्रचलन में थे। उन्होंने कहा कि सिक्के लगभग 16वीं से 17वीं सदी के बीच के हैं। उन्होंने कहा कि बरामद प्रेस पर ब्रिटिश कंपनी का हवाला है। जिससे प्रेस के भी कम से कम 300 साल पुराने होने का अनुमान लग रहा है। उन्होंने कहा कि बरामद सिक्के की कीमत बमुश्किल दो-चार हजार रुपये होगी लेकिन प्राचीनता के कारण ये बहुमूल्य हैं।
उकेरी गांव के निकट मिलते रहे हैं ऐसे सिक्के
रिसिया डिग्री कॉलेज के प्राचीन इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गया प्रसाद सिंह और किसान डिग्री कॉलेज के डॉ. शिवप्रताप सिंह का कहना है कि अवध के नवाबों की टकसाल नानपारा तहसील क्षेत्र में उकेरी गांव के निकट होने का पता चला था। इस गांव में आए दिन इस तरह के सिक्के मिलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि पुषाणकाल की एक प्रतिमा भी कुछ वर्ष पहले एक किसान को खेत की जुताई में मिली थी।
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तीन तरह के हैं सिक्के
दोनों प्रोफेसरों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर सिक्कों का आकलन किया है। इनके मुताबिक सिक्के तीन प्रकार के हैं। इनमें कुछ सिक्के छोटे, कुछ मंझोले और कुछ बड़े आकार के हैं।
100 साल से अधिक पुरानी चीजें होती महत्वपूर्ण
पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षक प्रोफेसर डीपी तिवारी ने बताया कि 100 साल से अधिक पुरानी वस्तुएं पुरातत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाती हैं। ऐसे में बहराइच में बरामद प्रेस और सिक्के अति दुर्लभ हैं, इसमें संदेह नहीं है।
ऐसे काम करता था बरामद प्रेस
प्रोफेसर डीपी तिवारी ने बताया कि जो प्रेस बरामद हुई है। उसके पिछले हिस्से में स्प्रिट की टंकी है। इस टंकी से एक पाइप प्रेस के अंदर गया है। जिसमें सूत की बत्तियां लगाई जाती थी। स्प्रिट से सूत की बत्तियों को ढिबरी की तरह जोड़ा जाता था। इन्हीं बत्तियों में आग लगाई जाती थी जिससे प्रेस गर्म होकर कपड़ों को सिलवटमुक्त बनाता था।
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