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पल-पल तटबंध की ओर बढ़ रही घाघरा

Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
Bahraich
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बहराइच। घाघरा नदी से बाढ़ की विभीषिका तो खत्म हो गई है लेकिन कटान अभी जारी है। नदी की लहरें महसी तहसील क्षेत्र में कटान करते हुए पल-पल तटबंध की ओर बढ़ रही हैं। नदी व तटबंध के बीच दो स्थानों पर महज सौ मीटर का फासला बचा है। ऐसे में अगर कटान इसी तरह जारी रही तो आदमपुर-रेवली तटबंध की तर्ज पर बेलहा-बेहरौली तटबंध की सुरक्षा पर खतरा मंडरा सकता है। निरंतर हो रही कटान के बावजूद अब तक बाढ़ खंड व ड्रेनेज खंड सरयू परियोजना की ओर से कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
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बेलहा-बेहरौली तटबंध का निर्माण 60 के दशक में जिले के लोगों को बाढ़ की विभीषिका से निजात दिलाने के लिए हुआ था। 95 किलोमीटर लंबा बेलहा-बेहरौली तटबंध उस समय घाघरा नदी से 14 किलोमीटर दूर था। नदी कटान करते हुए इस समय तटबंध के समीप पहुंच गई है। महसी तहसील के जोगलापुरवा और बिसवां गांव के निकट फासला महज सौ मीटर के आसपास बचा है। कटान रुक-रुककर जारी है और लहरें निरंतर बेलहा-बेहरौली तटबंध की ओर बढ़ रही हैं। ऐसे में वर्ष 2009 में नदी द्वारा हुई कटान की याद ताजा हो रही है। वर्ष 2009 में बाढ़ की विभीषिका अक्तूबर में खत्म हो गई थी। लेकिन आदमपुर-रेवली तटबंध के निकट घाघरा की कटान नवंबर तक चली थी जिसके चलते 60 मीटर तटबंध नदी में समाहित हो गया था। उस समय पानी कम था इसलिए तबाही नहीं हुई थी। इस बार महसी में जोगलापुरवा के निकट उसी अंदाज में घाघरा की लहरें कटान कर रही हैं। इस समय नदी में पानी भी 2009 की अपेक्षा अधिक है। ऐसे में अगर बेलहा-बेहरौली तटबंध पर घाघरा की लहरों ने थपेड़े लिया तो तबाही बड़े पैमाने पर हो सकती है। सरयू ड्रेनेज खंड के अधिशाषी अभियंता एसके शर्मा का कहना है कि नदी की हो रही कटान की सूचना मिली है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर पखवारे भर पूर्व ही जिला प्रशासन को मुहैया करा दिया गया है। शासन को भी प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से परियोजना को हरी झंडी मिलते ही बोल्डर व परक्यूपाइन योजना का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि तटबंध को किसी भी कीमत पर क्षतिग्रस्त नहीं होने दिया जाएगा।
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