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महसी व कैसरगंज के 22 और गांवों में घुसा पानी

Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
Bahraich
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बहराइच/जरवलरोड। घाघरा नदी एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जिसके चलते 22 और गांवों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कुल 82 गांव बाढ़ से घिरे हुए हैं। बाढ़ का पानी घरों में घुसने से अफरा-तफरी का माहौल है। लोग सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। अब तक बाढ़ चौकियां पूरी तरह से सक्रिय नहीं हो सकी हैं। जिससे बाढ़ व कटान पीड़ितों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
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घाघरा नदी एल्गिन ब्रिज पर गुरुवार सुबह 106.576 मीटर पर पहुंचकर रुक गई है। नदी का जलस्तर यहां पर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। उधर, बौंडी में नदी 112.050 मीटर पर रुकी हुई है। यहां पर नदी खतरे के निशान से 90 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। उफनाई घाघरा का पानी क्षेत्र में चारो ओर फैल गया है। जिससे बाढ़ का संकट बढ़ता जा रहा है। बुधवार तक महसी और कैसरगंज तहसील के 60 गांवों में बाढ़ की स्थिति थी, लेकिन पानी फैलने से अब दोनों तहसीलों के 82 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। गांवों में पानी लोगों के घरों में घुस रहा है। राहत और बचाव कार्य धीमी गति से होने से बाढ़ में फंसे लोग अपनी गृहस्थी समेटकर खुद सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। नावों की कमी के चलते लोगों को पलायन करने में दिक्कतें हो रही हैं।
इन गांवों में भी घुसा बाढ़ का पानी
महसी क्षेत्र के पूरे सीताराम, जानकीनगर, गलकारा, देवधरपुरवा, कल्लूपुरवा, महंतपुरवा, पूरेप्रसाद सिंह, अंगरौरा दुबहा, पूरे अर्जुन सिंह समेत 12 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिसके चलते महसी तहसील क्षेत्र में अब 52 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। उधर, कैसरगंज क्षेत्र के अहाता के छह व गोड़हिया के चार मजरों में घाघरा का पानी पूरी तरह प्रवेश कर गया है। इस क्षेत्र में 20 गांव पहले से ही बाढ़ की चपेट में थे।
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बाढ़ में बहकर आया मगरमच्छ, हड़कंप
बहराइच। घाघरा की बाढ़ में मगरमच्छ भी महसी तहसील के दो स्थानों पर बहकर आ गया है, जिससे लोगों में हड़कंप मचा है। चुन्नीलालपुरवा गांव के निकट तीन दिनों से मगरमच्छ देखा जा रहा है। उधर, जानकीनगर में भी मगरमच्छ से दहशत का माहौल है। ग्राम प्रधान नीतू सिंह उर्फ नीता ने बताया कि बुधवार शाम को बाढ़ के पानी से होकर गुजर रहे जगन्नाथ (70) पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया था। शोर सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने किसी तरह जगन्नाथ की जान बचाई। ग्राम प्रधान ने बताया कि मगरमच्छ होने की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को दे दी गई है, लेकिन अब तक सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
नाव मुहैया नहीं करा रहा प्रशासन
ग्राम प्रधान नीतू सिंह ने कहा है कि प्रशासन नाव की व्यवस्था नहीं करा रहा है। उन्होंने कहा कि दो स्टीमर दिए गए थे, लेकिन वह खराब हैं। निजी नाविकों की दो नावें हैं, लेकिन उन्हें वर्ष 2011 की बाढ़ में नाव संचालन का भुगतान नहीं किया गया है। जिससे उन सभी ने नाव संचालन से इनकार कर दिया है। ऐसे में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में परेशानी हो रही है।
मांग के अनुरूप मुहैया कराई जा रहीं नावें
एसडीएम कैसरगंज हरीराम सिंह व महसी घनश्याम त्रिपाठी ने बताया कि बाढ़ से घिरे गांवों के ग्रामीणों को मांग के अनुरूप नावें मुहैया करायी जा रही हैं। फ्लड पीएसी के जवान भी मोटर व रबर बोट से बाढ़ क्षेत्रों में गश्त कर रहे हैं। हरसंभव सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। दोनों एसडीएम ने कहा कि लंगर केंद्र का निरंतर संचालन हो रहा है। बाढ़ व कटान पीड़ितों को भोजन के पैकेट वितरित किए जा रहे हैं।
12 आशियाने नदी में समाहित
बहराइच। महसी तहसील क्षेत्र में बाढ़ के साथ कटान का कहर जारी है। अरनवा खास में 12 और ग्रामीणों के आशियाने नदी में समाहित हो गए हैं। कैसरगंज तहसील क्षेत्र में भी कटान जारी है। लगभग 375 बीघा खेती योग्य जमीन कटान की भेंट चढ़ गई है। घाघरा की बाढ़ और कटान से लोग परेशान हैं। प्रशासनिक इंतजाम नाकाफी दिख रहे हैं। कटान पर अंकुश लग ही नहीं पा रहा। जिसका नतीजा यह है कि अरनवा खास गांव घाघरा के निशाने पर है। गांव निवासी सुंदरसिंह, राघव सिंह, रानी, सुमन, अर्जुन, नगई, ज्ञानू, शारदा, अश्विनी, कोठारी, सूबेदार सिंह और ननकऊ सिंह समेत 12 लोगों के आशियाने रात से अब तक कटान की भेंट चढ़ गए हैं। इन सभी ने तटबंध पर शरण ले ली है। महसी तहसील में छत्तरपुरवा, अरनवा और खरखट्टनपुरवा के निकट लगभग 200 बीघा खेती योग्य जमीन कटान की भेंट चढ़ी है। उधर, कैसरगंज तहसील के बहरइचीपुरवा, ढपालीपुरवा, खासेपुर और गोड़हिया नंबर तीन में लगभग 175 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हो गई है।
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