बहराइच। दीपावली पर पटाखों की बात न हो तो पर्व की बात ही सूनी लगती है। लेकिन पटाखों के जलाने में तनिक लापरवाही जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। इसलिए पटाखे संभालकर जलाएं। क्योंकि जिंदगी कीमती है। तनिक सी चूक से जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। दीपावली का उल्लास और उमंग बरकरार रहे इसके लिए पटाखे में आग लगाते समय हर पल सजग रहना होगा। पटाखों के हानिकारक रसायन और धुएं न सिर्फ रोगी बना सकते हैं। बल्कि जिंदगी भर के स्वास्थ्य के लिए समस्या बन सकते हैं। ऐसे में पटाखे छुड़ाते समय कतई लापरवाही न बरते।
दीपोत्सव पर्व पर बाजार में हाईटेक पटाखाें की भरमार है। दीपावली की रात पटाखे से धूम-धड़ाका करने की हसरत सभी के मन में है। पटाखा खरीदने के लिए लोगों की भीड़ पटाखा बाजार में उमड़ रही है। पटाखा की दुकानों पर कुछ प्रतिबंधित पटाखे भी बिक रहे हैं। जो निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज के साथ फटते हैं। ऐसे में पटाखे जलाते समय काफी सजग रहना होगा। क्योंकि तनिक सी लापरवाही से पूरी जिंदगी पछताना पड़ सकता है। पटाखे देखने में भले ही आकर्षक लगें। लेकिन इनकी तेज आवाज व इनमें मिले हानिकारक रसायन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। पटाखों के जलने से सर्वाधिक परेशानी दमा व हृदय रोगियों को उठानी पड़ सकती है। पटाखे से निकलने वाले धुएं दिक्कत का सबब बन सकते हैं। धमाके और रोशनी वाले पटाखे जलाते समय बच्चों के साथ विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। क्योंकि बच्चे पटाखों के खतरों के प्रति अनभिज्ञ होते हैं। चिकित्सक भी पटाखे जलाते समय सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। जिससे कि प्रकाश पर्व दीपावली किसी के लिए हादसे का सबब न बने।
छोटे बच्चों को पटाखों से दूर रखें
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश अग्रवाल ने बताया कि पटाखे जलाते समय छोटे बच्चों को उस स्थान से कम से कम 5 मीटर की दूरी पर रखें। क्योंकि पटाखों के बारूद के धुएं के संपर्क में आने पर बच्चों के शरीर पर दाने निकल सकते हैं, आंखों में जलन की शिकायत भी हो सकती है। यदि ऐसा कोई लक्षण नजर आये तो शीघ्र ही चिकित्सक की मदद लें।
हृदय रोगी बरतें सावधानी
जिला चिकित्सालय के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मलय श्रीवास्तव का कहना है कि हृदय रोगियों को पटाखे फूटते समय सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषकर जो दिल की धड़कन व एंजाइना के रोगी हों, या जिन्हें पूर्व में हार्ट अटैक हो चुका हो। क्योंकि पटाखों के फटने पर दिल की धड़कन तेज हो जाती है और धमनियां सिकुड़ती हैं। ऐसे में दिल के रोगियों को दिक्कत हो सकती हैं। इसके अलावा दमा के रोगियों को पटाखों के धुएं से परहेज करने की आवश्यकता है। क्योंकि सांस फूलने की समस्या बढ़ सकती है।
बचाव के उपाय
कान में रुई लगाकर दागें पटाखे।
रोशनी के पटाखे जलाते समय पहनें चश्मा
बच्चों को बड़ों की देखरेख में जलवाएं पटाखे
पटाखे फोड़ते समय पानी भरी बाल्टी पास रखें
पटाखे जलाते समय ये बरतें सावधानी
1.पटाखे मैदान अथवा खुले स्थान पर ही जलायें।
2. आसपास पानी व रेत की बाल्टी अवश्य रखें।
3. फर्स्ट एड बॉक्स घर में अवश्य रखे व्यवस्था।
4. अधजले पटाखों को पुन: जलाने का प्रयास न करें।
5. पटाखे जलाते समय अधिक ढीले वस्त्र न पहनें।
आकस्मिकता के लिए अस्पताल प्रशासन तैयार
दीपावली पर्व पर आग लगने की घटनाओं या पटाखे में लोगों के घायल होकर अस्पताल पहुंचने की संभावनाओं के चलते अस्पताल प्रशासन ने भी व्यापक तैयारियां कर ली है। मुख्य चिकिसाधीक्षक डॉ. पीके टंडन ने बताया कि अतिरिक्त 20 बेड का इंतजाम किया गया है। 6 विशेषज्ञ चिकित्सक विशेष परिस्थिति के लिए ड्यूटी पर मुस्तैद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर अग्निकांड या जलने की घटना होती है तो पीड़ित को तत्काल इलाज मुहैया कराया जाएगा।
102 व 108 नंबर डायल कर मांगे एंबुलेंस
सीएमएस ने बताया कि अगर संयोगवश दीपावली के समय कोई दुर्घटना होती है तो अस्पताल का 102 या समाजवादी एंबुलेंस का नंबर 108 डायल कर तत्काल एंबुलेंस मंागे। जिससे रोगी को समय पर इलाज मुहैया कराया जा सके।
111 नंबर डायल करने पर पहुंचेगा दमकल
अग्निशमन अधिकारी शिवकुमार मिश्रा ने बताया कि अग्निकांड की घटना होने पर तत्काल टोल फ्री 111 नंबर डायल कर सूचना दें, जिससे दमकल वाहन मौके पर पहुंच सके।