पयागपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव के बाद जननी को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि पर अधीक्षक ने कुंडली मार ली है। प्रसव के बाद 877 महिलाओं को भुगतान नहीं किया गया। प्रसूताओं को 48 घंटे से पहले ही स्वास्थ्य केंद्र से डिस्चार्ज कर दिया गया। नियम के मुताबिक उन्हें मिलने वाला भोजन भी नहीं दिया गया।
डाइट रजिस्टर अस्पताल में नहीं मिला। इसका खुलासा अपर निदेशक की जांच में हुआ है। अपर निदेशक ने सीएमओ को निरीक्षण आख्या भेजी है। इसकी जानकारी उन्होंने शासन को भी दी है। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप है। अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. उमाकांत वर्मा ने बीते 19 अगस्त को पयागपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया था।
इस दौरान वार्ड आया कुशलावती, पर्यवेक्षक रमेश चंद्र, स्वास्थ्य कार्यकर्ता नीलम शुक्ला नदारद मिली थीं। इस रात तीन प्रसव हुए थे। लेकिन प्रसव होने के चंद घंटो बाद प्रसूताओं को डिस्चार्ज कर दिया गया। एडी ने इसे नियम विपरीत माना और जब डाइट रजिस्टर की मांग तो व्यवस्थाओं की कलई खुल गई।